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बुलंदशहर में शहीद हुए पुलिसकर्मी के पार्थिव शरीर को योगी राज में तिरंगा तक नसीब नहीं हुआ

योगी आदित्यानाथ इन दिनों अपने राज्य की बागडोर छोड़ दुसरे राज्यों में राम राज लाने का प्रचार कर रहे लेकिन अपने ही राज्य में फैल रही अराजकता रोकने में नाकाम साबित होते जा रहे है। इसी बीच योगी सरकार ने कुछ ऐसा किया जिससे ईमानदारी से काम करने वाले हर पुलिस वालों को आहत पहुची होगी।

जब बुलंदशहर में गोकशी को लेकर साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने लगा था। तब भीड़ को शांत करने पहुचें सुबोध कुमार सिंह की भगवा गुंडों ने हत्या कर दी। सुबोध कुमार सिंह की हत्या का मुख्य आरोपी बजरंग दल से तालुकात रखता है। लेकिन सरकार ने अपनी तरफ से कोई भी मंत्री या अधिकारी शहीद के परिवार से मिलने नहीं गया। वहीँ हाल में हुए पुलिस फायरिंग में एपल के मनेजर विवेक तिवारी के मौत के बाद खुद योगी आदित्यनाथ में विवेक तिवारी की पत्नी से मुलाकात कर नौकरी और मुआवजे का आश्वासन दिया। और तेरहवी के तीन खुद उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने 40 लाख रुपये का चेक कल्पना तिवारी को दिया। और साथ ही कल्पना तिवारी को नगर निगम में बतौर ओएसडी नौकरी दी गयी। ओएसडी पद क्लास वन ऑफिसर के पद के बराबर होता है। जिसमे ऑफिसर को गाड़ी और सरकारी बंगले तक मोहहाया करवाई जाती है।

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वहीँ दूसरी तरफ दंगा रोकने के लिए शहीद हुए इंस्पेक्टर सुबोध  कुमार सिंह के शव को पुलिस लाइन मेंबिना तिरंगा लपटें  श्रद्धांजलि के लिए रखा गया। इसके अलावा अभी तक शहीद के परिवार से मिलने सरकार की तरफ से कोई भी अधिकारी नहीं गया है। जिसको लेकर परिवार में खासा आक्रोश है। शहीद दरोगा के चाचा ने कहा कि सुबोध को जब गोली लगी तब उसके साथ कोई नहीं था। पुलिस मिली हुई है। ड्राइवर सारी बात जानता है। हमें 40 लाख रुपये नहीं चाहिए। योगी आदित्यनाथ हमसे खुद मिलने आएं। स्मारक बनाया जाए।  ऐसे में सबसे बड़ा सवाल खुद मुख्मंत्री जी पर उठता है की क्या जिस तरह वह तुरंत विवेक तिवारी को न्याय दिलवाए वैसे ही सुबोध कुमार को दिलवा पायेंगे।

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