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कांग्रेस को मध्यप्रदेश और राजस्थान के चुनाव में कांग्रेस महज जीत की शाबाशी ही नहीं बल्कि सबक भी ले

2019 आम चुनाव से पहले सेमी फाइनल माने जाने वाले मध्यप्रदेश , राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। लेकिन कांग्रेस को यह जीत जीत की तरह नहीं बल्कि एक सबक की तरह लेना चाहिए क्यूंकि मध्यप्रदेश में 15 साल की एंटी इंकम्बेंसी को भी अपने पक्ष में पूरी तरह लाने में नाकाम रही।

अगर चुनाव के नतीजों पर ध्यान दे तो छत्तीसगढ़ मेंकांग्रेस ने 68 सीटों के साथ क्लीन स्वीप किया। पूरे वोट परसेंट की बात करे तो 43%वोट मिला वहीं बसपा को 3।9% और नोटा को 2।0% वोट पड़े। कांग्रेस ने कहीं न कही 6फिसद वोटों का नुक्सान किया। फुलपुर और गोरखपुर उपचुनाव में यह साबित हो गया था कि अगर सभी विपक्षी दल एक साथ आते है तो बीजेपी को रोका जा सकता है लेकिन कांग्रेस इसे करने में नाकाम रही। कांग्रेस अगर बसपा से अभी से एक गठबंधन बना ले जो उसे 2019 में करना पड़ेगा तो छतीसगढ़ में उसके वोट शेयर और सीटें बढ़ जाती।    

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मध्यप्रदेश में कांग्रेस सीटों के हिसाब से कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी है लेकिन वोट प्रतिश्द के मामले में बीजेपी कांग्रेससे आगे है। बीजेपी को 41% वोट मिले है तो कांग्रेस को 40.9 % वोट मिले है। जबकिबसपा को 5% जो काफी बड़ा अंतर इस चुनाव में डाल सकता था। अगर हम भिंड और मुरैना जिलेकी बात करे तो इस इलाके में दलितों के वोट सबसे ज्यादा है। और कुल मिलाकर 11 सीटें है जिसमे महज दो बसपा जीत पायी है। अगर कांग्रेस और बसपा एक साथ चुनाव लडती तो खासकर इन 11 सीटों में 10 अपने नाम कर लेती और साथ ही जो लोग बीजेपी के सत्ता केखिलाफ नोटा पर 1.4 वोट डाले है वो भी कांग्रेस अपने पक्ष में लाने के लिए नाकाम रही।

कांग्रेस को सबसे ज्यादा कहीं नुक्सान हुआ है तो वो है राजस्थान। राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच की लड़ाई से काफीवोटों का नुक्सान हुआ है। सचिन पायलट एक तरफ जहाँ गुर्जरों के नेता है तो दूसरीतरफ गहलोत की अपनी वोट बैंक है। राजस्थान चुनाव से पहले वसुंधरा राजे के खिलाफ एक अलग हवा बह रही थी। राजस्थान में तो बसपा तीसरी सबसे बड़ीपार्टी बनकर उभरी है। राजस्तान में 6 सिट जीतकर कहीं न कहीं कांग्रेस को बहुमतनहीं मिला पाया। अगर इस राज्य में भी बात करे तो 4 लाख से ज्यादा वोट नोटा में पड़ाथा। जोकहीं न कही बीजेपी के खिलाफ था और कांग्रेस उसे अपने पक्ष में लाने से नाकामरही। एक समय ऐसा माना जा रहा था कि कांग्रेस राजस्थान में 120 से ज्यदा सीटों परजीत सकती है, लेकिन अच्छी मैनजेमेंट और आंतरिक लड़ाई लड़ाई के कारण जो वोट बीजेपी केखिलाफ पढने थे वो या तो नोटा को पढ़े या नयी पार्टियाँ जैसे राष्ट्रिय लोकतांत्रिक पार्टी को पढ़े है।  

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