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अगर आपको किसी ने कहा ‘मैं तुझे देख लूंगा’ तो वह नहीं होगा धमकी : गुजरात हाई कोर्ट

अगर आपको कोई कहता है कि ‘मैं तुझे देख लूंगा’ तो वह धमकी में शामिल नहीं होगा। साथ ही गुजरात हाई कोर्ट के अनुसार धमकी वह होती है, जिससे किसी के दिमाग में कोई डर पैदा हो। ‘मैं तुझे देख लूंगा’ कहने से कोई डर पैदा नहीं होता है।

आपको बता दें यह फैसला कोर्ट ने एक वकील के एफआईआर पर सुनवाई करते हुए दिया। साबर कांठा के वकील मोहम्मद मोहसिन छालोतिया मई 2017 में लॉकअप में बंद मुवक्किल से मिलने गए थे। पुलिस ने उन्हें मिलने से रोक दिया। बहस होने पर गुस्साए वकील ने पुलिसकर्मियों को देख लेने और हाईकोर्ट में घसीटने की धमकी दी थी। इस पर पुलिस ने वकील के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और ऑफिसर को ड्यूटी से रोकने का मामला दर्ज कर लिया। वकील तभी से जेल में हैं। उन्होंने एफआईआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस एएस सुपैया ने फैसले में कहा कि इस केस में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई, जिसे आपराधिक मानें।

मामले के केस में पुलिस ने आईपीसी की धारा 186, 189 और 506 (1) के तहत शिकायत दर्ज की। आईपीसी 186 जनसेवक के कामकाज में दखल करने के मामले में अपराध की धारा है। आईपीसी 189 जनसेवक को धमकी देने के मामले में लागू होती है। शिकायतकर्ता ने धमकी दी थी कि- ‘मैं तुम सभी को देख लूंगा और हाईकोर्ट जाऊंगा।’ सिर्फ हाईकोर्ट से संपर्क करने की बात कहने से चोट की बात स्पष्ट नहीं होती। धारा 506 में भी पीड़ित को धमकी देने वाले व्यक्ति को चोट पहुंचाने का इरादा स्पष्ट नहीं हुआ, इसलिए एफआईआर रद्द कर दी गई।

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