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आर्टिकल 370 बने रहने पर किसका क्या बिगड़ता था

केंद्र सरकर ने हाल ही में जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटा दिया है।  जिसके बाद कई लोग भारत सरकार के इस फैसले खुश है। तो विपक्ष के नेता इस फैसले का आलोचना कर रहे है। लेकिन अभी भी एक सवाल ये खड़ा होता है कि 3 आर्टिकल 370 अगर रहता तो किसी का क्या बिगड़ता।

आर्टिकल 370 जब जम्मू कश्मीर में लागू था तब वहां काम करने आये लोगो को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता था। जो लोग सोशल मीडिया के माध्यम से अपने दूर के रिश्तेदारों से जुड़े रहेते थे। उन लोगो को अपने रिश्तेदारों से संपर्क करने में परेशानी का सामना करना पड़ता था। क्योकि शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती और इंटरनेट का कई दिनों तक बंद होना ये बड़ी परेशानी थी।  

वही कई लोगों का वोटर लिस्ट में नाम भी नहीं है यानि कि औपचारिक रूप से वे खुद को भारत का नागरिक भी नहीं कह सकते। देश में होने वाले कई सारे सकारात्मक बदलाव भी जम्मू-कश्मीर के लिए किसी भी काम के नहीं है। जैसे, सरकारी नौकरियों में दलित, पिछड़ा और कुछ अन्य समूहों को मिलने वाले रिजर्वेशन, लेकिन जम्मू-कश्मीर में आरक्षण की व्यवस्था सिरे से अनुपस्थित है। रिजर्वेशन यहां हिंदू दलित-पिछड़ों मुसलमानों किसी को नहीं मिलता।

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जम्मू और श्रीनगर दोनों घनी आबादी वाले शहर हैं और लगता नहीं कि जमीनें, मकान और दुकानें वहां बहुत सस्ती होंगी। लेकिन केंद्र सरकार ने बाकी देश में बाकायदा ऐसा संदेश दिया है कि एक पूरा राज्य ही प्रॉपर्टी में निवेश के लिए खोल दिया गया है।

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