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Independence Day : जानें कौन थे मुल्ला पहलवान जिसने मारे थे दो अंग्रेज अफसर

बिठूर कटरी में ईश्वरीगंज गांव के मूलचन्द्र निषाद उर्फ मुल्ला पहलवान उन क्रांतिकारियों में थे, जो गुमनाम रह गए। गांव में महिलाओं से छेड़खानी करने पर मुल्ला पहलवान ने दो अंग्रेज अफसरों को मौत के घाट उतार दिया था।

गांव के एक निषाद परिवार में 1908 में जन्मे मूलचन्द्र उर्फ मुल्ला पहलवान ने जब जवानी की दहलीज पर कदम रखा तो देश की आजादी का सपना देखने लगे। अंग्रेजों से लड़ने के लिए पहलवानी सीखी। तभी से मुल्ला पहलवान के नाम से जाने गए। अंग्रेजों के लिए काम करने वाले कई पहलवानों को अखाड़े में धूल चटाई। 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आन्दोलन के दौरान अफसरों की एक टोली ईश्वरीगंज गांव के पास डेरा डाले थी। कुछ अंग्रेज कटरी के जंगलों में शिकार करने गए थे। तभी डेरे के पास से निकली महिलाओं से दो अफसरों ने छेड़खानी की। इसकी जानकारी होते ही मुल्ला पहलवान ने दोनों अंग्रेज अफसरों को मार डाला। उनके शव कटरी के जंगल में ले गऐ। अफसरों के लापता होने पर अंग्रेजी सेना ने ईश्वरीगंज पर हमला बोल दिया। गांव के लोग कटरी के जंगलों में छुप गए। उनकी फसलें बर्बाद कर दी गईं, पर ब्रिटिश सरकार को दोनों के शव नहीं मिले। मुल्ला पहलवान को कुछ दिन जेल में रहना पड़ा, पर सबूत न होने से उन्हें रिहा कर दिया गया।

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सुबह गांव में फहराया तिरंगा
देश में आजादी की पहली किरण के साथ ही मुल्ला पहलवान ने गांव में बने मन्दिर में तिरंगा फहराकर जश्न मनाया था। कई लीडर उनसे मिलने आए थे। शहर चलकर सम्मान लेने को कहा। इस पर मुल्ला पहलवान ने जवाब दिया था कि भारत मां की सेवा सम्मान पाने के लिए नहीं की है और वह नहीं गए।

आखिरी सांस तक रहे ग्राम प्रधान
1952 में पंचायत राज एक्ट का गठन होने के बाद गांव के विकास के लिए मूलचन्द्र उर्फ मुल्ला पहलवान प्रधान बने। 19 मार्च 1975 को उनका स्वर्गवास हो गया। लगातार गांव के प्रधान रहे। गांव को विकास की ओर ले गए। गांव में स्कूल से लेकर अन्य सुविधाएं मुहैया करवाईं।  

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