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हांफती रेंगती Automobile Industry

Auto  industry से लगातार गिरावट की खबरें आ रही हैं। पिछले 9 महीनों से गिरावट का दौर जारी है। बीता जुलाई 18 सालों का सबसे ख़राब महीना रहा है। इस दौरान बिक्री में 31% तक की गिरावट दर्ज़ की गयी। मंदी की वजह से ऑटो इंडस्ट्री अपने सबसे बड़ी गिरावट के दौर में पहुंच गई है। एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में बीते एक वर्ष के दौरान गाड़ियों की ख़रीद में भारी कमी आई है।

मांग में कमी की वजह से इस दौरान देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी और टाटा मोटर्स ने भी अपने उत्पादन में कटौती की है। लिहाजा हज़ारों की संख्या में नौकरियां भी ख़त्म हुई हैं। फेडरेशन ऑफ़ ऑटोमोबिल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के मुताबिक़, इस मंदी की वजह से बीते तीन महीने में दो लाख लोगों का रोज़गार छिन गया है। मंदी की वजह से कई डीलरशिप बंद हो गईं हैं। इस मंदी का असर गाड़ियों के कलपुर्जे बनाने वाली सहायक कंपनियों पर भी हुआ है। टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड के लिए सस्पेंशन (शॉकर) बनाने वाली जमना ऑटो इंडस्ट्री ने कहा कि कमज़ोर मांग के वजह से अगस्त में वो अपने सभी नौ उत्पादन संयंत्रों को बंद कर सकते हैं।

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Auto  industry पर दोहरी मार तब पड़ी जब जून में बजट के दौरान ऑटो पार्ट्स पर ड्यूटी बढ़ाई गई और पेट्रोल, डीज़ल पर अतिरिक्त टैक्स लगाया गया। मंदी से निपटने के लिए अब इस उद्योग में जीएसटी की दरों में कटौती जैसे उपायों की मांग तेज़ हुई है। ऑटो इंडस्ट्री के लोगों ने मांग की है कि सरकार को automobile sector में जीएसटी की दर 28% से घटाकर 18% करनी चाहिए।

पिछले हफ़्ते ऑटो सेक्टर के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाक़ात की और उन्हें हालात की दुश्वारियों से अवगत कराया। सरकारी सूत्रों के अनुसार ऑटो इंडस्ट्री की मंदी को दूर करने के लिए सरकार परामर्श कर रही है, लेकिन अब तक industry की मांग को लेकर किसी भी ठोस कदम या उपाय की घोषणा नहीं की गयी है।

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