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अयोध्या विवाद पर वकील बोले- अयोध्या में जन्में थे राम, इससे आगे न जाए कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में आज यानि कि बुधवार को अयोध्या भूमि विवाद मामले को लेकर छठे दिन की सुनवाई हुई। इस पर हिंदू पक्ष के वकील एस वैद्यनाथन ने बेंच के सामने स्कंद पुराण का उदाहरण देते हुए अपनी दलीलें पेश की। उन्होंने कहा कि लोगों में भगवान राम के प्रति विश्वास और आस्था के परे कोर्ट इस तथ्य पर नहीं जा सकती कि वे तर्कसंगत हैं या नहीं। रिवाज है कि सरयू नदी में स्नान करने के बाद राम जन्मभूमि के दर्शन का लाभ मिलता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- ये पुराण कब लिखा गया था? वैद्यनाथन ने जवाब दिया- यह पुराण वेद व्यास द्वारा महाभारत काल में लिखा गया, लेकिन कोई नहीं जानता कि यह कितना पुराना है।

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी पूछा- जो आप कह रहे है उसमें राम जन्मभूमि के दर्शन के बारे में कहा गया है, देवता के बारे में नहीं? वैधनाथन ने कहा- वह इसलिए क्योंकि जन्मस्थान खुद में ही एक देवता है। फ्रेंच ट्रेवलर विलियम फिंच 1608 से 1611 तक अयोध्या में रहे और उन्होंने एक किताब लिखी थी, जिसमें राम जन्मभूमि का अस्तित्व स्पष्ट है। दूसरे यात्री जोसफ टाइपन बैरल थे, जो अयोध्या आए और उन्होंने किताब में राम जन्मभूमि का जिक्र किया था। लेखक विलियम फोस्टर ने ‘अर्ली ट्रैवल्स इन इंडिया’ बुक में उन सात अंग्रेज यात्रियों के बारे में बताया है, जो अयोध्या के बारे में लिख चुके हैं।

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