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नेताओं की नज़रबंदी के चलते जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, कर रहें ये मांग

हाल ही में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटा दिया। इस दौरन केंद्र सरकार ने ऐसे नेताओं को भी घाटी में नजरबंद कर लिया था, जिससे घाटी की शांति व्यवस्था भंग हो सकती थी। जिसके बाद उन्हें रिहा करने की बात कहीं जाने लगी।

जेएनयू छात्रा व पूर्व छात्र संघ लीडर शहला राशिद, और जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा जावेद के ट्वीट के बाद नेताओं की गिरफ्तारी का मुद्दा गर्माने लगा है। नेताओं की नजरबंदी से विपक्षी दल दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की अगुवाई में इस सर्वदलीय प्रदर्शन में कांग्रेस की ओर से गुलाम नबी आजाद और कार्ति चिदंबरम मौजूद हैं। इसके साथ ही आरजेडी नेता मनोज झा, शरद यादव, सीपीएम पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात, जम्मू कश्मीर की नेता शेहला रशीद समेत कई नेताओं ने कश्मीर में गिरफ्तार किए गए नेताओं को तुरंत रिहा करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान शेहला ने कहा कि ‘भारतीय सेना जब मामले की जांच कराएगी तो मैं सबूत दूंगी’ ।

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आपको बता दे पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने शेहला रशीद के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दायर की थी। इसमें कथित तौर पर भारतीय सेना और भारत सरकार के खिलाफ फर्जी खबर फैलाने के आरोप में शेहला की गिरफ्तारी की मांग की गई थी

पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर से केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35 ए हटा दिया था। जिसके बाद इसे दो भागों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया। इसके साथ ही सरकार ने सुरक्षा मद्देनजर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यहां भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की,  इंटरनेट सेवाएं को बंद और महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया था।

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