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हिंदी दिवस: मातृभाषा हिंदी से जुड़ी जानें खास बातें

14 सितंबर को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, 1918 में आयोजित हिंदी साहित्य सम्मेलन में महात्मा गांधी ने हिंदी को आम जनमानस की भाषा बताते हुए इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा देने के लिए कहा था। 1953 से 14 सितंबर का दिन हर साल ‘हिंदी दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा। जानें इस दिन से जुड़ी ये खास बातें:-

-हिंदी को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए 1975 से ‘विश्व हिंदी सम्मेलन’ का आयोजन शुरू किया गया।

-1997 में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया था कि भारत में 66 फीसदी लोग हिंदी बोलते हैं, जबकि 77 प्रतिशत इसे समझ लेते हैं।

-2016 में डिजिटल माध्यम पर हिंदी में समाचार पढ़ने वालों की संख्या 5.5 करोड़ थी, जो 2021 में बढ़कर 14.4 करोड़ होने का अनुमान है।

-दक्षिण प्रशांत महासागर क्षेत्र में फिजी नाम का एक द्वीप देश है, जहां हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है।

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-अमेरिका में लगभग 150 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों में हिंदी का पठन-पाठन हो रहा है।

-हिंदी दुनिया के 30 से अधिक देशों में पढ़ी-पढ़ाई जाती है। लगभग 100 विश्वविद्यालयों में उसके लिए अध्यापन केंद्र खुले हुए हैं।

-भारत के अलावा मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और नेपाल में भी हिंदी बोली जाती है।

-हिंदी में उच्चतर शोध के लिए भारत सरकार ने 1963 में केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना की। देश भर में इसके आठ केंद्र हैं।

-1977 में पहली बार तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को हिंदी में संबोधित किया था।

-1805 में लल्लूलाल की लिखी ‘प्रेम सागर’ को हिंदी की पहली किताब माना जाता है। इसका प्रकाशन फोर्ट विलियम, कोलकाता ने किया था।

-1900 में ‘सरस्वती’ में प्रकाशित किशोरीलाल गोस्वामी की कहानी ‘इंदुमती’ को पहली हिंदी कहानी माना जाता है।

-1913 में दादा साहेब फाल्के ने ‘राजा हरिश्चंद्र’ का निर्माण किया, जिसे पहली हिंदी फीचर फिल्म कहा जाता है।

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-पहली बोलती हुई हिंदी फिल्म ‘आलम आरा’ 14 मार्च 1931 को रिलीज हुई। इसके निर्देशक आर्देशिर ईरानी थे।

-1826 में हिंदी के पहले समाचार पत्र (साप्ताहिक) ‘उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन कोलकाता से शुरू हुआ।

-1796 में कोलकाता में टाइप आधारित पहली हिंदी पुस्तक का प्रकाशन हुआ। यह हिंदी व्याकरण की पुस्तक थी।

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