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iPhone 11 Pro के तीन कैमरों से हो रहा है ट्राइपोफोबिया, यूजर्स को लग रहा है डर

एपल ने 10 सितंबर को कैलिफोर्निया में अपना पहला तीन कैमरे वाला iPhone 11 Pro लॉन्च किया। कंपनी का सारा फोकस कैमरे की खूबियों को बताने पर है लेकिन सोशल मीडिया यूजर इसे ‘ट्राइपोफोबिया’ नाम के दिमागी डर से जोड़ रहे हैं।

यह पहली बार है जब मोबाइल के कैमरे की तुलना किसी दिमागी डर से की जा रही है। यूजर्स का कहना है इसके 3 कैमरों का जियोमेट्रिक डिजाइन ऐसा है कि इससे काले रंग के होल्स को एक साथ देखने पर डर लगता है। अमेरिकन साइकाइट्रिक एसोसिएशन के मुताबिक, छोटे-छोटे holes और उभार को देखकर लगने वाले डर को ट्राइपोफोबिया कहते हैं। अमेरिका में 2015 में पहली बार एक रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया था। खासतौर पर पश्चिमी देशों के लोगों में इस फोबिया को लेकर काफी डर फैला है और इसके शिकार हर उस चीज से डरते हैं जिसमें उन्हें एक साथ कई छेद नजर आते हैं। लोग मधुमक्खी के छत्ते, कमल के सूखे बीजों जैसी चीजें देखते हैं, तो सहम जाते हैं।

ट्राइपोफोबिया जर्मन भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘ट्रिप्टा’ यानी छिद्र और ‘फोबोज’ का मतलब है डर। 2005 में पहली बार इस शब्द का प्रयोग किया गया। यह एक तरह का डर है, जिसे अब तक डिसऑर्डर की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। अमेरिकन साइकाइट्रिक एसोसिएशन का कहना है, अब तक इसका इलाज नहीं खोजा जा सका है। इसका वास्तविक कारण भी नहीं सामने आ पाया है।

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वहीं, सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें iPhone 11 Pro के 3 कैमरे के साथ छिद्रों के समूह भी नजर आ रहे हैं, जो घबराहट पैदा करते हैं। ट्राइपोफोबिया से जूझ रहे लोगों का कहना है, ऐसी तस्वीरें डर और घबराहट बढ़ाने का काम कर रही हैं। यह कोई मजाक नहीं हैं। कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो इस डिसऑर्डर को भूल चुके हैं, लेकिन उन्हें यह फिर याद आ रहा है।

सोशल मीडिया यूजर का कहना है, वे ऐसा करके लोगों को ट्राइपोफोबिया के बारे में जागरूक कर रहे हैं। इसके जवाब में दूसरे यूजर का कहना है, मैं ट्राइपोफोबिया को नहीं जानता था लेकिन जब इंटरनेट पर इसके बारे में सर्च किया तो डर पैदा हुआ। अब में इस विकार का शिकार हो गया हूं। iPhone 11 Pro के नाम से ही शरीर में डर की लहर दौड़ जाती है। यह फोन मुझमें एक नए तरह का डर पैदा कर रहा है।

ट्राइपोफोबिया से पीड़ित लोगों में कई तरह के लक्षण दिखते हैं। जब ये कई छिद्र वाली चीजों को देखते हैं तो डर के साथ मिचली, खुजली, अधिक पसीना आने लगता हैं। कई बार शरीर कांपने लगता है और पेनिक अटैक भी आ सकता है। सभी मामलों में डर सबसे सामान्य लक्षण है। ट्राइपोफोबिया कागज पर प्रिंट तस्वीर को देखकर भी हो सकता है। अगर कई सारे छिद्र देखकर आपमे ऐसे लक्षण नजर आते हैं, तो मनोरोग विशेषज्ञ से सलाह लेने की जरूरत है।

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ट्राइपोफोबिया के मामले आमतौर पर मधुमक्खी के छत्ते, स्ट्रॉबेरी, कमलगट्टा, अनार, कीट-पतंगों की आंखें, सी स्पंज देखने पर सामने आते हैं। डर के कारण शरीर के रोंगटे खड़े जाते हैं। कुछ मामले में ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है।

इस डिसऑर्डर का फिलहाल कोई इलाज नहीं है, लेकिन कुछ थैरेपी इसका डर कम करने में मदद करती हैं। जैसे- एक्सपोजर और बिहेवियरल थैरेपी।

एक्सपोजर थैरेपी : इसमें मरीज को ऐसी चीजों से सामना करना सिखाया जाता है जिसके कारण उसमें डर पैदा हो रहा है। डर का कारण बनने वाली तस्वीरें और चीजें मरीज को दिखाई जाती हैं। कई बार ऐसी चीजों को छूने के लिए भी कहा जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे उनमें डर खत्म होता है और बेचैनी कम होती है। उन्हें अहसास होता है कि यह एक आम बात है और लक्षणों में कमी आती जाती है।

बिहेवियरल थैरेपी : इस थैरेपी के दौरान विशेषज्ञ मरीज के व्यवहार को नियंत्रित करने की कोशिश करता है। उसके मन से किसी खास चीज के प्रति नकारात्मक व्यवहार को बदला जाता है। मरीज में धीरे-धीरे बदलाव आता है। धीरे-धीरे वह डर का कारण बनने वाली चीजों को देखकर सामान्य व्यवहार करने लगता है। ऐसे मामलों में ज्यादातर थैरेपी दी जाती है लेकिन डिप्रेशन और बेचैनी बढ़ने पर एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं दी जाती हैं।

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