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एक युवा पत्रकार चढ़ा डॉक्टर की लापरवाही की भेंट

कोई भी अस्पताल भगवान का दूसरा घर होता है। जहां पर लोगों कि जान बचाई जाती है लेकिन अगर अस्पताल ही रक्षक की जगह भक्षक बन जाए तो? अगर अस्पताल ही लोगों की ज़िन्दगी से खिलवाड़ करे तो ? ऐसा ही एक मामला अलीगढ़ के अस्पताल में हुआ है, जहां पर एक युवा की ज़िन्दगी के साथ ऐसा खिलवाड़ किया गया कि उसकी मौत हो गयी। जो कि ज़िन्दगी के सफर में कुछ ही कदम चला था। जो कल तक अपने दोस्तों के साथ हंस खेल रहा था, लेकिन अस्पताल की गैरजिम्मेदारी की वजह से वो हमेशा के लिए शांत हो गया।

जिस युवा पत्रकार की मौत हुई है उसका नाम अंकित पचौरी था। वह अलीगढ़ का  रहने वाला था ।वह नोएडा के khabarinfo नाम की न्यूज़ वेबसाइट में काम करता था और छुट्टी लेकर अपने घर अलीगढ़ गया था। घर जाकर उसे बुखार आया, उसने डॉक्टर के पास चेकअप करवाया और टेस्ट भी करवाए, टेस्ट में उसे डेंगू की लक्षण मिले, लेकिन उसकी तबियत इतनी खराब नहीं थी। अपने ताऊ जी के कहने पर वो के.के.अस्पताल ( फेज 1, रामघाट रोड , सरस्वती विहार, फेज 1, ADA कॉलोनी, अलीगढ़)  में भर्ती होने गया। अंकित जब अस्पताल में भर्ती हुआ तब सामन्य था सिर्फ रिपोर्ट्स में डेंगू का जिक्र था। एडमिट होने के बाद उसकी हालत ठीक थी और सभी डॉक्टर्स भी यही कह रहे थे कि एक दो दिन में बिल्कुल ठीक होकर चले जाओगे। किसी भी डॉक्टर और अस्पताल के स्टाफ ने कोई खास सीरियस मामला होने की बात नहीं कही। जाहिर है ये कोई चिंता की बात नहीं थी। अंकित और सभी घरवाले डॉक्टर की सलाह से संतुष्ट थे कि जल्द ही बुखार ठीक हो जाएगा। लेकिन अगले ही दिन उसकी मृत्यु हो गयी।

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जब khabarinfo, जहां अंकित काम करते थे, ने उनके बारे में विस्तार से जानना चाहा तो वहां पर डॉ. Varshney से बात हुई जिन्होंने फ़ोन पर बताया  कि 12 सितम्बर को अंकित पचौरी एडमिट हुए और उन्हें डेंगू था और पेरासिटामोल की दवाई देकर उनका इलाज किया जा रहा था । इसी के साथ डॉक्टर ने बताया कि अचानक से उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया और उनके घरवालों को सूचना दी गयी। और साथ ही अंकित को ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने की दवाई भी दी, लेकिन अंकित की हालत ठीक नहीं हुई जिसके बाद के.के.अपस्ताल के डॉक्टर्स ने उन्हें रात 9 बजे नोएडा के सेक्टर-62 fortis हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया। उनके परिवार वाले उन्हें एम्बुलेंस में fortis हॉस्पिटल ला रहे थे तब बुलंदशहर आते-आते रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गयी।

जब डॉ. Varshney से पूछा कि इतने सीरियस मामले में अपने लापरवाही क्यों बरती, क्यों समय रहते उनके सभी जाँचे नहीं की गयीं, क्यों उनकी मोनिटरिंग ठीक से नहीं कि जा रही थी, तब डॉ. Varshney का जवाब था कि आप शिकायत कीजिये इसका जवाब हम फोरम में देंगे।  

जिस के.के.अपस्ताल में अंकित भर्ती था उस अस्पताल के बारे में अभी तक कई सारी शिकायतें सामने आई हैं। लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से ये बताया है कि के.के.अस्पताल अलीगढ़ का सबसे बेकार अस्पताल है। यहाँ लोगों की ज़िन्दगी से खेला जाता है।

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मोनिका रोहित गर्ग नाम की एक महिला ने फेसबुक पोस्ट के जरिये इस अस्पताल के बारे शिकायत की है। सिर्फ ये ही नहीं ऐसे ना जाने कितने लोग हैं जो इस अस्पताल कि लापरवाही या कहें पैसों की भूख की बलि चढ़ चुके हैं। ऐसे बहुत सारे लोगों ने फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इसकी शिकायत की है और लोगों से अपील की है कि भूल कर भी इस अस्पताल का रुख ना करें। क्योंकि ये अस्पताल लोगों को स्वस्थ देने के लिए नहीं बल्कि उनके पैसों के बदले उनकी जान से खिलवाड़ करने के लिए है।

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हमारा मकसद यहाँ किसी को बदनाम करने की नहीं है लेकिन एक जिम्मेदार मीडिया ग्रुप होने के नाते हमारा ये फर्ज है कि हम इस तरह कि हो रही लूट और जान के खिलवाड़ के प्रति लोगों को जागरुक करें। और आप लोगों से भी ये अनुरोध है कि एक जागरुक नागरिक होने के नाते ऐसे डॉक्टर्स और अस्पतालों के खिलाफ आवाज उठाएं और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इनके बारे में सूचित करें जिससे भविष्य में किसी और व्यक्ति की जान ऐसे लोगों के हाथ का खिलौना ना बन पाए।    

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One thought on “एक युवा पत्रकार चढ़ा डॉक्टर की लापरवाही की भेंट

  • सितम्बर 17, 2019 at 6:31 पूर्वाह्न
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    बहुत दुखद घटना,,,,भाई प्रदीप एक उभरते हुए पत्रकार के रूप में आपकी लेखन शैली तथा शब्दों का बेजोड़ इस्तेमाल काफी सराहनीय है,,,

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