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आज है पापकुंशी एकादशी, व्रत रखने से होता है ये फायदा

दशहरे के बाद आने वाली एकादशी यानी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापकुंशी एकादशी का व्रत होता है। कई लोग ये सोचते हैं कि इस एकादशी का नाम पापकुंशी क्यों पड़ा तो आपको बता दें कि इसलिए पड़ा क्योंकि इस दिन व्रत रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

इसमें भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है। इस व्रत में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। रात्रि जागरण कर भगवान का स्मरण करना चाहिए। रात्रि में भगवान विष्णु की मूर्ति के समीप ही शयन करना चाहिए। द्वादशी तिथि को सुबह ब्राह्माणों को अन्न का दान और दक्षिणा देने के बाद यह व्रत समाप्त किया जाता है।

व्रत से एक दिन पहले दशमी के दिन गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल तथा मसूर का सेवन नहीं करना चाहिए।

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