fbpx

मुस्लिमों पर अत्याचार करने की वजह से अमेरिका ने चीन के 28 संस्थानों को किया ब्लैकलिस्ट

अमेरिका ने चीन में उइगर मुसलमानों पर अत्याचार में कथित रूप से शामिल 28 संस्थानों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। दरसल बैन की गई इन संस्थाओं पर अल्पसंख्यक उइगर मुसलमानों के साथ क्रूरता और अमानवीयता करने का आरोप है।

इन संस्थानों को निगरानी सूची में डाल दिया गया है। अब इन पर सरकार की मंजूरी के बगैर, अमेरिकी कंपनियों से किसी तरह की सामग्री खरीदने पर पाबंदी लगा दी गई है। सूची में शामिल संस्थानों में चीन की सरकारी एजेंसियां और तकनीकी कंपनियां शामिल हैं। इनमें से कुछ जासूसी के उपकरण भी बनाती हैं।

बता दे इससे पहले भी अमेरिका चीनी संस्थानों पर व्यापार प्रतिबंध लगाता रहा है। मई में ट्रंप प्रशासन ने संचार उपकरण बनाने वाली कंपनी हुआवे को सुरक्षा चिंताओं के चलते निगरानी सूची में डाला था। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के मुताबिक, निगरानी सूची में डाले गए सभी चीनी संस्थानों के खिलाफ शिनजियांग प्रांत में मानवाधिकार के हनन और ताकत के दुरूपयोग की शिकायतें हैं।

ये भी पढ़ें :-  POK में ऐसे कोई कैंप थे ही नहीं जो तबाह हो:- आसिफ गफूर

वही इस पर मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि चीन उइगर मुसलमानों की आवाज को दबा रहा है। उन्हें बिना कारण के कैद में डालकर प्रताड़ित कर रहा है। अमेरिकी निगरानी दल के मुताबिक, शिनजियांग में चीनी अत्याचार का शिकार होने वाले उइगर मुसलमानों की संख्या दस लाख तक पहुंच गई है।दूसरी तरफ चीन का कहना है कि शिनजियांग प्रांत में आंतक से लड़ने के लिए प्रशिक्षण केंद्र चल रहे हैं। चीन ने किसी तरह की प्रताड़ना के आरोपों से भी इनकार किया है।

चीन ने पूर्वी तुर्कस्तान पर 1949 में कब्जा कर लिया था। उइगर मुसलमान तुर्किक मूल के माने जाते हैं। शिनजियांग में कुल आबादी का 45 फीसदी उइगर मुसलमान हैं। जबकि चालीस फीसदी आबादी हान चीनी हैं। चीन ने तिब्बत की तरह शिनजियांग को स्वायत्त क्षेत्र घोषित कर रखा है। हान चीनी और उइगर मुसलमान अपनी संस्कृति बचाने के लिए बड़े पैमाने पर विस्थापित होते रहे हैं।

ये भी पढ़ें :-  करतारपुर कॉरिडोर के लिए हर यात्री से 1400 रुपये वसूलना पाक की जिद्द

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.