fbpx

चीन के बदले-बदले सुर

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो दिवसीय दौरे पर 11 और 12 अक्टूबर को भारत आ रहे हैं, मगर उससे पहले ही भारत के प्रति चीन के सुर बदल गये हैं। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद चीन ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था। चीन ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी करने पर कहा था कि भारत जम्मू-कश्मीर की यथास्थिति से कोई छेड़छाड़ न करे। जब पाकिस्तान इस मामले को संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद में ले गया तब वहां भी चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया था।

कुछ दिनों पहले पाकिस्तान में चीन के राजदूत याओ जिंग ने कहा था कि कश्मीर विवाद पर चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा रहेगा। याओ जिंग ने ये भी कहा था कि ‘हम कश्मीरियों को उनके मौलिक अधिकार और इंसाफ़ दिलाने की कोशिश कर रहे हैं”, लेकिन अब चीन कह रहा है कि भारत और पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाएं। चीन के रुख़ में ये परिवर्तन गौर करने वाला है क्योंकि जो देश कश्मीर समस्या का समाधान यूएन चार्टर और उसके प्रस्तावों के तहत होने की वकालत कर रहा था वही अब कह रहा है कि कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान द्विपक्षीय संवाद के ज़रिए समाधान की तलाश करें। यहाँ सबसे अहम बात ये है कि ये सारे बयान ऐसे समय में आ रहे हैं जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान चीन के दौरे पर हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का चीन दौरा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे के ठीक पहले हुआ है।

ये भी पढ़ें :-  आमंत्रण में आम नागरिक की तरह आएंगे मनमोहन सिंह:- पाक मंत्री

मौजूदा समय की सबसे खास बात ये है कि अब चीन को पंचशील का सिद्धांत याद आ रहा है। भारत में चीन के राजदूत सुन वेइडॉन्ग ने ट्वीट करके पंचशील के सिद्धांत का ज़िक्र करते हुए लिखा है, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता के माहौल में भारत और चीन को अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी सहयोग मज़बूत करना चाहिए। ठीक उसी तरह जैसे हमने कभी एक साथ पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किया था। वही पंचशील सिद्धांत, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बुनियाद बन चुका है।”

इसके अलावा चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा है, “भारत और चीन दोनों विकासशील देश हैं। दोनों ही देश उभरते हुए बड़े बाज़ार हैं। बीते साल वुहान में भारत और चीन के बीच शुरू हुई वार्ता से रिश्तों ने अच्छी लय पकड़ी है। दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग के साथ आगे बढ़ रहे हैं और मतभेदों को संवेदनशीलता के साथ संभाल रहे हैं।”

ये भी पढ़ें :-  बिजली गिरने से फुटबॉल कोच की मौत

अहम बात ये है कि चीन इस वक़्त आर्थिक संकट से जूझ रहा है, एक तो ग्लोबल आर्थिक मंदी का दौर है और उस पर अमेरिका ने चीनी सामान पर इम्पोर्ट ड्यूटी भी बढ़ा दी है। इस सब के प्रभाव से चीन की विकास दर प्रभावित हुई है। अमेरिका के अलावा भारत भी चीनी सामान का बहुत बड़ा बाजार है। भारत और चीन के बीच व्यापार में काफी असंतुलन है यानि भारत चीन से ज़्यादा सामान इंपोर्ट करता है जबकि चीन को कम सामान एक्सपोर्ट करता है। यह स्थिति भारत के हित में नहीं है मगर चीन को इससे बहुत फ़ायदा है। ऐसे में चीन ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता जिससे भारत और चीन के रिश्ते (व्यापारिक रिश्ते) पर असर पड़े। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बिरादरी भी कश्मीर मुद्दे पर भारत के साथ ही है ये बात चीन बखूबी जानता है इसीलिए चीन पाकिस्तान से करीबी रिश्ते तो चाहता है मगर ये भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों की कीमत पर नहीं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.