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कमलेश तिवारी हत्याकांड: यूपी में जंगलराज कायम, हत्यारे पुलिस की पहुंच से दूर

यूपी में जंगलराज चल रहा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश को लेकर ये बड़ा बयान दिया था जो कई हद तक सही साबित हो रहा है। कमलेश तिवारी की हत्या के मामले पर नज़र ड़ाली जाए तो ऐसा ही लगता है कि सरकार जब खुद के लोगों के लिए कुछ नहीं कर सकती तो आम जनता के लिए क्या करेगी।

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन शूटरों की गिरफ्तारी अभी भी सबसे बड़ी चुनौती है। पुलिस की कई टीमें शूटरों की तलाश में लगी है।19 अक्तूबर को साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को यह भी पता चल गया था कि हत्यारे वारदात के बाद ट्रेन से बरेली पहुंचे, वहां एक अस्पताल में इलाज भी कराया। यहां क्राइम ब्रांच पहुंची लेकिन तब तक वह अस्पताल से निकल गए थे। यहां से रामपुर होते हुए मुरादाबाद तक हत्यारे गए। क्राइम ब्रांच, एसआईटी और एसटीएफ लगातार इन लोकेशन पर पहुंचती रही थी। एक अधिकारी ने बताया कि हत्यारों रात ही में यूपी से बाहर निकल जाने की फिराक में थे। पर, घायल हत्यारे का इलाज कराने के लिये ये बरेली में एक अस्पताल में काफी देर तक रुके थे। इस दौरान उनकी फोटो काफी वायरल हो रही थी, लिहाजा वह रामपुर व मुरादाबाद के बीच में ही कहीं रुक गए।

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1- पुलिस यह भी मान रही है कि लोकेशन लगातार ट्रेस होने की भनक उन्हें लग चुकी है। इसलिये  कानपुर की तरह रामपुर या मुरादाबाद में उन्होंने नया मोबाइल व सिम कार्ड न ले लिया हो। ताकि उनकी लोकेशन न मिल सके। कमलेश तिवारी की गोली मारकर हत्या करने वाले फरार शूटर ने गुजरात के पते का आधार कार्ड की कॉपी देकर कानपुर के रेलबाजार से सिम खरीदा था। एसटीएफ ने सिम देने वाली कान्हा टेलीकॉम की महिला संचालिका से लंबी पूछताछ की। इसमें 17 अक्तूबर को रात आठ बजे सिम लेने के बाद एक घंटे में चालू होने की पुष्टि हुई है।

2- पुष्कल पांडे ने एसटीएफ को बताया कि सिम लेने चार लोग पैदल आए थे। वे काफी जल्दी में थे। सिम लेने के बाद उन्होंने लखनऊ जाने का रास्ता और वाहन के बारे में भी जानकारी की। पुष्कल ने उनको झकरकटी बसअड्डे का रास्ता बताया तो टाटमिल की तरफ चले गए। एसटीएफ को संदेह है कि हत्यारोपित रोडवेज की बस से लखनऊ गए होंगे। पुष्कल के अनुसार, चारों की बोलचाल कानपुर या आस-पास की नहीं लग रही थी।

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3- रविवार को एक बार फिर एसटीएफ की टीम सेंट्रल स्टेशन पहुंची। एसटीएफ को आशंका है कि हत्यारोपित कानपुर से बलसाड़ के बीच चलने वाली उद्योग कर्मी एक्सप्रेस से आए थे। इसको देखते हुए पुलिस घटना से चार दिन पहले के रिकॉर्ड देख रही है। सेंट्रल स्टेशन पर खास तौर से सूरत से कानपुर आने वाले यात्रियों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। घटना के पहले के सीसीटीवी फुटेज का मिलान देर रात तक जारी रहा। एसटीएफ ने स्टेशन और उसके आसपास के 12 स्थानों से सीसीटीवी फुटेज जुटाए हैं। मोबाइल स्टोर भी सेंट्रल स्टेशन से 800 मीटर के दायरे में है। 

4- मोबाइल स्टोर संचालिका पुष्कल पांडे ने एसटीएफ को बताया कि उनके स्टोर में चार लोग आए थे। तीन हत्यारोपित पकड़े जा चुके हैं। फरार अशफाक के बारे में भी जानकारी है। ऐसे में पांचवां व्यक्ति कौन और कहां है? उसका कनेक्शन लखनऊ और कानपुर का तो नहीं है? इस बारे में एसटीएफ पता लगाने की कोशिश करेगी। जल्द ही स्टोर संचालिका को चारों हत्यारोपितों के फुटेज दिखाए जाएंगे, जिनके बारे में जानकारी है। इससे पता यह पता चल सकेगा कि यही चारों हत्या स्टोर आए थे या कोई और था जो हत्याकांड के दौरान के फुटेज में नहीं है।

5- कमलेश तिवारी की हत्या की साजिश में सूरत में गिरफ्तार तीनों आरोपियों मौलाना मोहसिन शेख,फैजान और रशीद अहमद पठान उर्फ राशिद की तीन दिन की ट्रांजिट रिमाण्ड पुलिस को मिल गई है। यूपी से गई क्राइम ब्रांच तीनों आरोपियों को सोमवार को लखनऊ लेकर आयेगी। तीनों को यहां की कोर्ट में पेश किया जायेगा। इसके बाद एटीएस, एसटीएफ और खुफिया विभाग के कई अधिकारियों के साथ ही एसआईटी तीनों से पूछताछ करेगी। यह भी माना जा रहा है कि इन आरोपियों को लेकर पुलिस बिजनौर, मुरादाबाद और पीलीभीत भी जा सकती है। पीलीभीत से राशिद के सम्पर्क बताये जा रहे हैं। कमलेश तिवारी की हत्या के 22 घंटे बाद ही तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर इस हत्याकाण्ड का खुलासा यूपी पुलिस ने कर दिया था। इन लोगों ने भड़काऊ बयान का बदला लेने के लिये कमलेश की हत्या की साजिश रची थी। रशीद ही मुख्य आरोपी था और उसने ही सूरत से अशफाक हुसैन और मोइनुद्दीन को हत्या करने के लिये लखनऊ भेजा था।

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6- कमलेश तिवारी हत्याकांड के तार मुरादाबाद मंडल से जुड़ रहे हैं। संदिग्धों की तलाश में शनिवार देर रात एक साथ मंडल भर में कई स्थानों पर हाईवे पर रोडवेज बसों की सघन चेकिंग की गई। एक-एक यात्री को उतारकर आईडी को चेक किया गया। कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया। जांच के बाद सभी को रिहा कर दिया गया। पुलिस कार्रवाई से यात्री किसी अनहोनी की आशंका में घिरे रहे। खुफिया इनपुट के बाद शनिवार देर रात मंडल भर में अचानक भारी फोर्स हाईवे पर आ गई। देखते ही देखते बसों की चेकिंग शुरू कर दी गई। मुरादाबाद में भी रामपुर हाईवे पर जबरदस्त चेकिंग हुई। एक-एक यात्री की आईडी देखी गई। आईडी नहीं दिखा पाने वालों से जबरदस्त पूछताछ की गई। बताए गए नंबर पर पुलिस द्वारा बातचीत की गई। पूरी तरह से संतुष्ट होने के बाद ही शक के घेरे में आए यात्रियों को गंतव्य के लिए जाने दिया गया।

7- कमलेश की हत्या के मामले में पुलिस को एक और सफलता हाथ लगी। पता चला कि हत्यारे सूरत से लखनऊ आने के बाद लालबाग के होटल खालसा इन में रुके थे। शनिवार रात को होटल प्रबन्धन से सूचना मिलने पर ही लखनऊ पुलिस इस होटल पहुंची थी। हत्यारों के कमरे (जी-103) में खून से सने भगवा कपड़े, हत्या में इस्तेमाल चाकू और बैग बरामद हुआ। इसके अलावा शेविंग क्रीम, ब्लेड समेत कई और चीजें भी मिलीं। होटल में दोनों युवकों ने आईडी के तौर पर अपना आधार कार्ड दिया था। आधार कार्ड से हत्यारों की पहचान सूरत निवासी शेख अशफाक हुसैन और पठान मोइनुद्दीन अहमद के रूप में हुई।

वहीं, यूपी पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों अशफाक और मेईनुद्दीन पर ढाई-ढाई लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। राजधानी में हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की निर्मम हत्या की साजिश गुजरात में रची गई थी। इलेक्ट्रानिक सर्विलांस की मदद से यूपी पुलिस और गुजरात एटीएस ने गुजरात के सूरत से तीन लोगों को गिरफ्तार कर इसका खुलासा किया है।

सरकार जहां हिंदु धर्म की बातें करती है वहीं कमलेश तिवारी की मां का आरोप है कि एक bjp नेता ने उन्हें जबरदस्ती मुख्यमंत्री से मिलने को कहा जबकि उनका धर्म इसकी अनुमति नहीं देता की वे 13 दिन के अंदर किसी से भी मिले। सरकार न कमलेश तिवारी को बचा पाई न उनको इंसाफ दिला पा रही है चल रहा है तो सिर्फ जंगलराज।

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