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सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों की जिम्मेदार खुद सरकार

आज कल के समय सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफार्म बन गया है। जहां से आपकी फोटो, विडियो और कोई भी लेख कुछ ही समय लाखों लोगो तक पहुंच सकते हैं। लेकिन सोशल मीडिया के जरिये नफरत भरे भाषण, फर्जी खबर और राष्ट्र विरोधी गतिविधियां भी काफी ज्यादा हुई हैं। जिसके बाद अब केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि इंटरनेट लोकतांत्रिक राज्य व्यवस्था को अकल्पनीय नुकसान पहुंचाने वाला शक्तिशाली हथियार बनकर उभरा है।

केंद्र ने सोशल मीडिया संस्थानों के कामकाज को नियंत्रित करने के नए नियमों को अंतिम रूप देने के लिए तीन और महीने का समय मांगते हुए यह बात कही।

एक रिपोर्ट के अनुसार अभी तक भ्रामक (फर्जी) खबर के 257 मामले दर्ज किए गए हैं। मध्यप्रदेश फर्जी संदेश फैलाने के मामले में पहले नंबर पर रहा। यहां 138 मामले रिपोर्ट हुए। 32 मामलों के साथ यूपी दूसरे और 18 के साथ केरल तीसरे स्थान पर रहा। जम्मू कश्मीर में फर्जी खबर के केवल चार मामले दर्ज हुए।

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फर्जी खबर चलाने के मामले में केंद्र की सरकार ही जिम्मेदार है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस समय पर केंद्र की सत्ता पर बीजेपी की सरकार है। पूरे देश को भगवा करने में जुटी बीजेपी सोशल मीडिया के प्लेटफार्म के जरिये दूसरी पार्टी के खिलाफ नफरत भरे भाषण, फर्जी खबर चलाती है और इस चीज का बढ़ावा भी देती है।

गुजरात चुनाव के समय राहुल गाँधी ने एक बयान दिया था जिसका विडियो देशभर में वायरल हुआ और इस विडियो को बीजेपी पार्टी ने अलग अंदाज से पेश किया और सोशल मीडिया पर वायरल ये वीडियो राहुल गांधी का पूरा बयान नहीं दिखाता है। राहुल गांधी ने अपन बयान में कहा था कि “आलू के किसानों को कहा कि ऐसी मशीन लगाउंगा कि इस साइड से आलू घुसेगा उस साइड से सोना निकलेगा। इस साइड से आलू डालो, उस साइड से सोना निकालो। इतना पैसा बनेगा कि आपको पता नहीं होगा कि क्या करना है पैसे का। ये मेरे शब्द नहीं है, नरेंद्र मोदी जी के शब्द हैं।” तब सिर्फ राहुल गाँधी का आधा बयान दिखाया गया। जिसके बाद  राहुल गाँधी का सोशल मीडिया पर खूब मजाक उड़ा। और ये सिलसिला अभी भी जारी है।

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किसी नेता के खिलाफ कोई गलत बयान को दिखाना उसकी छवि को धूमिल करना पार्टी के आईटी सेल का मुख्य काम है। यहाँ पर अपने नेता को बढ़ चढ़कर बताना और दूसरे नेता नीचा को दिखाना, अपने कुतर्कों से अपनी हर बात सही और दूसरे की हर बात गलत साबित करना ही मुख्य काम है।

आज के समय अगर कोई भी शख्स सत्ताधारी नेता के खिलाफ बोलता है या कोई भी टिप्पणी करता है तो उसके कुछ समय बाद ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है। तो ऐसे में अगर विपक्षी दलों पर या उसके नेताओ पर सत्ताधारी पार्टी के जुड़े संगठन द्वारा दुष्प्रचार किया जाता है और फिर भी उन पर को करवाई नहीं की जाती है तो इसका इसका सीधा सा अर्थ ये है कि सरकार जान कर ये करवा रही है।     

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