fbpx

आईआईटी प्रोफेसर को मेडिकल इनोवेशन की धुन, टीम ने 55 डिवाइस बनाकर लिए पेटेंट, 5 प्रोडक्ट आए बाजार में

आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर बी रवि कुमार और मुंबई आईआईटी स्थित ‘बेटिक लैब’ के मेडिकल इनोवेशन मरीजों के जीवन काे आसान बना रहे हैं। पिछले चार साल में लैब से निकले 55 मेडिकल डिवाइस के आइडियाज का पेंटेंट हो चुका है।  इनमें से 5 प्रोडक्ट तो बाजार में आ भी चुके हैं।

इसमें डायबिटिक फुट स्क्रिनिंग डिवाइस 2 अक्टूबर को लॉन्च हुई है। यह बाजार में मौजूद वर्तमान डिवाइस से 30% सस्ती होगी। ऐसा ही एक किफायती प्रोडक्ट ट्यूमर टेस्ट करने वाली बायाेप्सी गन है, जिसकी सुई अब कई बार इस्तेेमाल हो सकेगी। यह सुई भी वर्तमान से 50% सस्ती है।

मेडिकल इनोवेशन का यह सिलसिला 2004 में शुरू हुआ था। प्रोफेसर कुमार बताते हैं कि तब टाटा मेमोरियल के डॉक्टर्स ने पैर का ऑपरेशन देखने के लिए मुझे बुलाया था। डाक्टर्स आर्टिफिशियल घुटने का सस्ता विकल्प बनाने में तकनीकी मदद चाहते थे। मैंने डिवाइस बनाकर दी और यह क्रम चल पड़ा।

इस बीच दुर्घटना में मेरे बेटे के टखने में फ्रेक्चर हुआ तो डॉक्टर्स ने ऑपरेशन की सलाह दी। लेकिन मैंने थ्रीडी प्रिंटर से ऐसा जूता बनाया, जिसे प्लास्टर की तरह पहना जा सकता है। प्रयोग पहली बार बेटे पर ही किया, जो सफल रहा।

ये भी पढ़ें :-  Realme X2 Pro जल्द होगा लॉन्च

छोटे से कमरे में लैब, 30 करोड़ रुपए सरकार की फंडिंग 

ओडिशा में जन्मे प्रो. कुमार बेंगलुरु से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स और पीएचडी हैं। 1992 से वे आईआईटी मुंबई में कार्यरत हैं और यहीं 100 स्क्वैयर फीट के एक छोटे-से कमरे में उनकी बेटिक लैब है। इनोवेटर इसे सर्किट हाउस कहते हैं।

लैब को भारत सरकार और महाराष्ट्र सरकार से 30 करोड़ रुपए की फंडिंग मिलती है। प्रोफेसर ने 60 प्रोफेशनल्स की टीम बनाई है। टीम के कुछ सदस्य इंटेल, एलएंडटी जैसी कंपनियों में अपनी जॉब छोड़कर आए हैं।

डिजिटल चश्मे, फैक्चर्ड लिंब जैसे इनोवेशन किए

  •  कबाड़ से ऐसा डिवाइस बनाया जो जली त्वचा को सिकुड़ने नहीं देता और हाथ की कसरत में मदद करता है। 
  •  ऐसा चश्मा, जो कृत्रिम आंख की हरकतों को असली आंख के समान चलाता है। इससे कृत्रिम आंख भी असली लगती है। 
  •  फैक्चर्ड लिंब पट्टी, जो लपेटी जा सकती है। पानी में भिगोने पर 3 मिनट में यह टाइट हो जाती है और प्लास्टर का काम करती है।
ये भी पढ़ें :-  पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बताई भारत की आर्थिक बीमारी की जड़

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.