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इस वजह से भारत हुआ RCEP समझौते से बाहर

सोमवार को बैंकाक में Regional Comprehensive Economic Partnership (RCEP) वार्ता के लिए तैयार 16 देशों के शीर्ष नेताओं की बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा ऐलान किया है।

पीएम मोदी ने बैठक में कहा है कि मौजूदा वैश्विक हालात और समझौते के प्रारुप में उसके हितों व मुद्दों को पूरा स्थान नहीं दिए जाने की वजह से भारत इसमें शामिल नहीं होगा। अब भारत के बगैर ही एशिया प्रशांत क्षेत्र के 15 बड़े देश RCEP यानी रीजनल कंप्रेहेंसिव इकोनोमिक पार्टनरशिप नाम से गठित होने वाले मुक्त व्यापार समझौते को आगे बढ़ाएंगे। माना जा रहा है कि सस्ते आयात से अपने उद्योग धंधों को बचाने के लिए समझौते में खास प्रावधान नहीं होने की वजह से ही भारत ने इससे बाहर होने का फैसला किया है।

RCEP के शीर्ष नेताओं की बैठक को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत RCEP में शामिल नहीं होगा और इसके लिए ना तो गांधी के सिद्धांत और ना ही उनका जमीर इस समझौते में शामिल होने की इजाजत दे रहा है। यह फैसला एक आम भारतीय के जीवन और उसके जीवनयापन के साधनों खास तौर पर समाज के बेहद निचले तबके के जीवन पर पड़ने वाले असर को देखते हुए किया जा रहा है।

पीएम ने यह भी साफ तौर पर बताया कि आरसेप (RCEP) का मौजूदा मसौदा पत्र इसके मूलभूत सिद्धांतों के मुताबिक नहीं है और कुछ मूल मुद्दों के साथ भारत कोई समझौता नहीं कर सकता। इसके साथ ही पीएम मोदी ने आरसेप के उन देशों को लताड़ भी लगाई जो भारत पर दबाव बनाने की कोशिश में हैं। उन्होंने कहा यह बताने में कोई गुरेज नहीं कि, अब वे दिन नहीं हैं जब बड़ी शक्तियां भारत पर वैश्विक सौदेबाजी करने का दबाव बना देती थीं। बढ़ते कारोबारी घाटे में कटौती करना और भारतीय सेवाओं व निवेश के लिए समान मौका मिलना भारत की दो प्रमुख मांगें थीं जिसके प्रति सदस्य देशों ने गंभीरता नहीं दिखाई है।

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इस बैठक में शामिल विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) विजय ठाकुर सिंह ने बताया कि इस समझौते का भारत के गरीब तबके पर बड़ा असर हो सकता है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि आरसेप (RCEP) के खिलाफ पूरे देश में पिछले कुछ दिनों से जबरदस्त मुहिम शुरू हो गई थी। किसान संघों से लेकर विपक्षी दल और भारतीय उद्यमी भी इसके खिलाफ लामबंद हो चुके थे। माना जा रहा था कि यह समझौता भारतीय बाजार को चीन के मैन्यूफैक्चरिंग उत्पादों और न्यूजीलैंड व आस्ट्रेलिया के कृषि उत्पादों से पाट देगा। यह छोटे व मझोले उद्यमियों के साथ ही भारतीय किसानों के हितों को भी नुकसान पहुंचाएगा।

आरसेप (RCEP)के शीर्ष नेताओं की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि भारत की तरफ से कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिनका अभी तक समाधान नहीं निकल पाया है। सभी आरसेप के सदस्य इन मुद्दों को सुलझाने के लिए आपस में बात करेंगे ताकि सभी पक्षों की सहमति के मुताबिक आगे का रास्ता निकल सके। भारत सरकार की तरफ से तो इस तरह से बताया गया है कि आरसेप के लिए उसने अपने दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर दिया है। सचिव (पूर्व) सिंह ने यह भी अपने प्रेस कांफ्रेंस में कुछ ऐसा ही इशारा किया लेकिन आस्ट्रेलिया व थाइलैंड के नेताओं ने अलग से कहा है कि आगे भारत के लिए इस समझौते में शामिल होने का रास्ता खुला रहेगा। इन फैसलों के आधार पर भी भारत का अंतिम फैसला निर्भर करेगा। बहरहाल, आरसेप के सदस्य शेष 15 देश वर्ष 2020 में इसे लागू करने का समझौता करेंगे।

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आपको बता दें भारत के इस फैसले से RCEP के देशों के लिए एक करारा झटका माना जा रहा है क्योंकि चीन, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देशों की नजर भारत के विशाल घरेलू बाजार पर थी। लेकिन जानकारों का मानना है कि इस फैसले का कुछ नकारात्मक असर भी भारत को झेलना पड़ सकता है।

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