fbpx

नोटबंदी के 3 साल बाद भी हुए कई घोटाले

8 नवम्बर 2016, वक़्त के साथ तारीख गुजर जाती है लेकिन कुछ तारीखें हमेशा के लिए याद रह जाती हैं। 8 नवम्बर 2016 ये वो तारीख है जब देश के प्रधानमंत्री रात को टीवी पर आते हैं और एक घोषणा करते हैं। पीएम मोदी कहते है 8 नवंबर की रात 8 बजे से 1000 और 500 के नोट लीगल टेंडर नहीं होंगे मतलब कि 500 और  1000 के नोट नहीं चलेंगे फिर क्या था इसके बाद लोगों के पास रखे 1000 और 500 के नोट महज एक कागज का टुकड़ा बन गये।

नोटबंदी (Demonetisation) का ऐलान करके मोदी जी ने पूरे देश को चौंका दिया था। साथ ही सरकार ने लोगों को समय दिया अपने पैसे जमा करवाने का और नोटों को बदलने का जिसके बाद सभी लोग बैंकों की लाइन में लग गये अपने पुराने नोट को बदलने में।

क्या नोटबंदी सफल रही?

आज नोटबंदी को 3 साल हो गये हैं, और उसके परिणाम हमारे सामने हैं। नोटबंदी का कदम एक बड़ा फैसला था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले धन, भ्रष्टाचार और आतंक से लड़ने के लिए 3 उद्देश्यों को बताया था। लेकिन नोटबंदी होने के बाद आरबीआई ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा कि 2016-17 के बीच पुराने और नए नोटों को छापने में 7 हजार 965 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं इसके बाद साल 2017-18 में यह राशि 4 हजार 912 करोड़ रुपये रह गई थी। जबकि उससे पहले साल 2015-16 में नोट छपाई पर 3 हजार 421 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। केवल 107 अरब रुपये के नोट ही वापस नहीं आए थे।

ये भी पढ़ें :-  विधु विनोद चोपड़ा की फ़िल्म "शिकारा -ए लव लेटर फ्रॉम कश्मीर" इस दिन होगी रिलीज!

आतंकवाद की कमर तोड़ना

जिन वजहों को बताकर पीएम मोदी ने नोटबंदी की थी क्या उसमे से कुछ भी हासिल हुआ। आतंक की बात करें तो नोटबंदी के बाद आतंकवादी घटनाओं में और भी इजाफा हुआ है। बल्कि नोटबंदी के बाद जो 2000 के नए नोट जारी हुए वो सबसे पहले आतंकियों के पास ही मिले। इसी के साथ कई सारी आतंकी घटना भी हुईं जिसकी वजह से देश के कई जवान भी शहीद हुए।

कालेधन का सफाया

कालेधन की बात करें तो नोटबंदी से ये अंदाजा लगाया गया था कि काला धन वापस आएगा मतलब कि नए नोट जारी होने के बाद जिन लोगों ने कालेधन के रूप में कई करोड़ो रूपये छुपा रखे थे। उनके नोट कागज का टुकड़ा बन गये थे और सरकार ने सिर्फ कुछ हज़ार की रकम बैंक में जमा करवाने की छुट दी थी। इस वजह से वो ज्यादा पैसा जमा नहीं करवा सकते लेकिन नोटबंदी के बाद RBI की एक रिपोर्ट आई, जिसमें ये कहा गया कि 99 प्रतिशत से ज़्यादा रूपये वापस आ चुके थे इसका मतलब है कि कालाधन था ही नहीं, या जो था भी वो भी अब सफ़ेद हो गया

ये भी पढ़ें :-  अमित शाह का कांग्रेस पर तंज, कहा- 70 साल दिए, आपने कुछ नहीं किया

भ्रष्टाचार पर वार

वहीं भ्रष्टाचार की बात करे तो एक रिपोर्ट एक अनुसार 2016 में हुई नोटबंदी के बाद 2016-17 में बैंकों में भ्रष्टाचार के 5,076 मामले सामने आये और ये घोटाला  23,933.85 करोड़ का था।

# 2017-18 में 5,916 मामले सामने आये और ये 41,167.03 करोड़ रूपये के थे।

#2018 -19 की बात करे तो इसमें  6,108 मामले सामने आये और ये घोटाला  71 ,429 करोड़ का था।

नोटबंदी के दौरान हुईं मृत्यु

वहीं इस नोटबंदी के कारण उस दौरान देश में 105 से ज्यादा मौत हो गयीं। जिसमे कई सारे बैंक के कर्मचारी हैं तो कई सारे वो लोग हैं जो आपने ही पैसों के लिए दिन रात बैंक के चक्कर लगाते रहे। और ये नोटबंदी उनकी मौत का सबब बन गयी।

जहां नोटबंदी के दौरन ऐसा लगा था कि देश में कालाधन वापस आएगा, भ्रष्टाचार का खात्मा होगा, आतंकवाद की कमर टूट जाएगी लेकिन हुआ इसके विपरीत ये सब तो पहले से बढ़ा ही साथ ही बेजरोजगारी भी बढी इसके अलावा अर्थव्यवस्था की हालत हम देख ही रहे है

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.