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देश में Chronic Obstructive Pulmonary ( दमा )Disease के 3 करोड़ मरीज, ऐसे करें बचाव

देश में दमा के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे मरीजों की समस्या स्मॉग या प्रदूषित वातावरण में और भी बढ़ जाती है। इन मरीजों को अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। डॉक्टर के परामर्श से इनहेलर और दवाओं की मात्रा सुनिश्चित करवानी चाहिए।
स्मॉग की स्थिति क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) की स्थिति को बदतर बना सकती है। देश में सीओपीडी के लगभग तीन करोड़ मरीज हैं। यह बीमारी प्रमुख रूप से धूमपान करने वालों को होती है, लेकिन धूमपान न करने वाले भी इसका शिकार हो सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से बॉयोमास ईंधन का उपयोग करने वाली महिलाएं व परोक्ष धूमपान (पैसिव स्मोकिंग) से प्रभावित व्यक्ति शामिल हैं।

ऐसे करें बचाव

मानक के अनुरूप मास्क जैसे एन-95 का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर मास्क का इस्तेमाल नहींकर पा रहे हैं तो अपने पास रूमाल या गमछा रखें और उसे नाक को कवर करते हुए बांध लें। शाम को घर पहुंचकर गर्म पानी से भाप लें, जो आपकी सांस नली को साफ करने का काम करती है।

  • जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें।
  • अपने घर के आसपास पौधे लगाने की कोशिश करेें।
  • जितना हो सके खुद को प्रदूषित वातावरण से सुरक्षित रखें।
  • घरों के खिड़की दरवाजे बंद रखें। आजकल सुबह- शाम न टहलें।
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स्मॉग का स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव

मस्तिष्क

स्मॉग के दुष्प्रभाव से सिरदर्द तथा माइग्रेन का दौरा भी पड़ सकता है।

आंखें

आंखों में जलन साथ ही आंखों से पानी आ सकता है। इससे बचाव के लिए आंखों पर चश्मा लगाएं।

नाक

छींक आना, नाक में खुजली होना, नाक बहना व नाक बंद होना इस समस्या के आम लक्षण हैं। गर्म पानी की भाप लेना इसमें कारगर सिद्ध होता है।

गला

गले में खराश और खांसी पैदा हो सकती है। इसके लिए गुनगुने पानी से गरारे करना लाभकारी होता है।

श्वसन तंत्र

यह प्रदूषण फेफड़ों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होता है। यह प्रदूषण सांस की कई बीमारियों का भी कारक है।

दिल

हाई ब्लड प्रेशर तथा लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण के संपर्क में रहने से हार्ट अटैक की आशंका भी अन्य स्वस्थ लोगों की तुलना में काफी बढ़ जाती है।

त्वचा

लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण के संपर्क में रहने से खुजली एवं त्वचा का कैंसर भी हो सकता है।

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