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Moody’s ने बिगाड़ा मूड, भारत की रेटिंग Negative

Moody’s, Fitch, IMF, SBI, RBI ये वो नाम हैं जो लगातार भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी का संकेत दे रहे हैं। ताज़ा मामले में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी Moody’s ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी रेटिंग जारी की है। Moody’s  ने भारत को BAA2 रेटिंग दी है इसी के साथ Moody’s ने रेटिंग Stable (स्थिर) से Negative (नकारात्मक) कर दी है। इस रेटिंग से पता चलता है कि देश मंदी की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा एजेंसी का कहना है कि भारत में आर्थिक मंदी की समस्या लंबे समय तक रह सकती है, साथ ही ये भी बताया कि देश में कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है।

Moody’s  सॉवरेन रिस्क ग्रुप के वाइस प्रेसीडेंट विलियम फोस्टर ने कहा है कि भारत में खासतौर से ग्रामीण इलाक़ों में आर्थिक स्थिति ज़्यादा गम्भीर है। बेरोज़गारी और कम नौकरियों की वजह से अब ये सरकार पर निर्भर करता है कि वो इस समस्या से निपटने के लिए कैसे काम करती है। उन्होंने आगे कहा है कि अगर ऐसे ही आर्थिक मंदी बनी रही तो लोगों की लाइफ स्टाइल और इनकम पर असर पड़ेगा। साथ ही हाई इन्वेस्टमेंट का बने रहना भी मुश्किल हो जाएगा।

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Moody’s  का मानना है कि निवेशक देश में आर्थिक मंदी के बने रहने के समय पर खास तवज्जो देते हैं। साथ ही GDP पर भी खासतौर से ध्यान देते हैं। पिछले महीने Moody’s ने फाइनेंशियल ईयर 2019-20 के लिए ग्रोथ रेट अनुमान घटाकर 5.8 फीसदी कर दिया, इसके पहले GDP ग्रोथ अनुमान 6.2 फीसदी था।

आज नोटबंदी को तीन साल बीत चुके हैं और नतीजे सबके सामने हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। कमोबेश हर सेक्टर मंदी की चपेट में है और कुछ सेक्टर तो अपने लाइफटाइम गिरावट के दौर से गुज़र रहे हैं। बेरोज़गारी अपने चरम पर है और असल में मांग में कमी का यही सबसे बड़ा कारण है। ये बिलकुल साफ़ है जब लोगों के पास रोज़गार नहीं होगा तो पैसा नहीं होगा और जब पैसा नहीं होगा तो बाजार में डिमांड (मांग) नहीं होगी।

मगर हमारी सरकार मांग को बढ़ाने के उपाय करने के बजाय अपना fiscal deficit बढ़ा रही है। सरकार कॉरपोरेट कर में कटौती करके सिर्फ कॉरपोरेट जगत को राहत दे रही है लेकिन ये कहीं से भी तर्कपूर्ण नहीं है। अब ये साफ़ हो चुका है कि ग्रामीण इलाक़ों में स्थिति ज़्यादा गंभीर है। इसका कारण भी स्पष्ट है क्योंकि नोटबंदी की सबसे ज़्यादा मार छोटे और मझोले उद्योगों पर पड़ी है। इसलिए छोटे कारोबार करने वाले लोग इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। अब यदि सरकार वाकई संजीदा है तो उसे अर्थव्यवस्था में सुधार की शुरुआत भी यहीं से करनी होगी।

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