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GDP धड़ाम महंगाई बेलगाम

GDP ग्रोथ रेट लगातार घट रहा है ऐसे में एक और बुरी खबर सामने आ रही है जिसने कोढ़ में खाज वाली स्थिति पैदा कर दी है। अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर बढ़ गई है। RBI की लगातार कोशिश है कि रिटेल इन्फ्लेशन 4 फीसद से नीचे रहे मगर बीते महीने में ये बढ़कर 4.62 फीसद हो गया है। ये वृद्धि 15 महीनों में सबसे ज़्यादा है।

मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन (MOSPI) के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के कारण यह तेजी आई है। खुदरा महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार ने एक मीडियम टर्म इनफ्लेशन टारगेट तय किया है। इसके तहत मार्च 2021 तक महंगाई दर की ग्रोथ को 4 फीसदी बनाए रखने की कोशिश की जाएगी। अक्टूबर में फूड प्राइस की ग्रोथ 7.89 फीसदी रही। खाने-पीने की चीजों के दाम तीन साल में सबसे ज्यादा हो गए हैं। इसकी वजह से खुदरा महंगाई दर बढ़ी है।

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RBI के लिए नयी मुसीबत

Consumer Price Index में बढ़ोतरी ने RBI की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर करने के लिए RBI लगातार रेपो रेट में कटौती कर रहा है। जिसका अर्थ है कि ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए केंद्रीय बैंक सिस्टम में तरलता (liquidity) को बढ़ा रहा है। जब सिस्टम में तरलता बढ़ेगी तो डिमांड पैदा होगी और जब डिमांड बढ़ेगी तो उद्योग धंधे पनपेंगे। ऐसे में यदि RBI अपना रुख पहले जैसा रखता है तो inflation और बढ़ेगा और यदि inflation control करने के लिए liquidity पर लगाम कसता है तो इसका सीधा असर demand यानि मांग पर पड़ेगा, क्योंकि liquidity पर लगाम कसने से डिमांड में कमी आएगी। System में मांग की पहले ही कमी है और अधिकांश सेक्टर मंदी की चपेट में हैं।

पिछले एक दो महीनों में खाने पीने की वस्तुओं के दाम में ज़बरदस्त वृद्धि हुई है। सब्ज़ियों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं मगर समय रहते उन पर काबू पाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए। इसे देखकर लगता है कि सरकार का रवैया एक ऐसे डॉक्टर का है जो इलाज के बजाय पोस्टमार्टम में ज़्यादा यकीन रखता है।

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