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कश्मीर में हर दिन सुधर रहे हैं हालात: सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने रखी दलील

जम्मू कश्मीर में अनुच्चेद 370 हटाने से जुड़ी अनुराधा भसीन और गुलाम नबी आजाद की याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज कल हम अपने पेपर की बजाय हम विदेश की खबरों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। सुनवाई से पहले बेंच ने साफ किया कि वह डिटेंशन यानी हिरासत के मामले में कोई सुनवाई नहीं करेगी। जस्टिस एन वी रमन्ना ने स़ॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि उन्हें जम्मू कश्मीर में प्रतिबंधों से जुड़े हर सवाल का जवाब देना होगा।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गयी कि जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाया गया और उसके बाद से वहां जो कुछ भी हो रहा है वह सब प्रतिबंधित है। याचिकाकर्ताओं की ओर से मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद की समस्या केवल कुछ क्षेत्रों में ही है लेकिन पूरे आबादी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और सभी कश्मीरियों से आतंकवादियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है।

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कश्मीर में हर दिन हालत में लगातार सुधार हो रहा है और याचिकाकर्ताओ के आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।

तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के सामने आतंकवाद से जुड़े आंकड़े पेश किये जिनके मुताबिक जम्मू कश्मीर में कुल 71038 आतंकवादियों की जानकारी थी। इनमें से अब तक 22536 आतंकवादी मारे गये हैं। 2019 में 365 आतंकवादी मारे गये हैं। जबकि सुरक्षा बलों के 5292 जवान शहीद हुएअ हैं और करीब 14 हजार नागरिकों को जान से हाथ धोना पड़ा है।

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सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार का मौलिक कर्तव्य नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करना है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में लोगों के अधिकार छीने नहीं गए बल्कि वहां के लोगों को अधिकार दिए गए हैं। वहां परक अभी तक एससी-एसटी आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा था। वहां की विधानसभा स्थानीय नागरिकों को इस संवैधानिक अधिकार से वंचित रख रही थी। महिलाओं को घरेलू हिंसा से सुरक्षा नहीं थी। बाल विवाह निरोधक अधिनियम प्रभावी नहीं था। साथ ही जनता की भलाई में इस्तेमाल होने वाला पैसा खर्च नहीं हो रहा था। ज़मीन पर काम नहीं हो रहा था। अब सीधे पंचायतों को पैसा जा रहा है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हमारे पास जम्मू कश्मीर, लद्दाख तीनो के लिए चार्ट है। हम वहाँ की स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं।

उन्होंने कोर्ट को ये भी बताया कि स्कूल खोले जा रहे है। 27 सितंबर से अधिकतर स्कूल खुल गए हैं। जबकि अदालत को इस मामले में गुमराह किया गया। यही नहीं, लगातार प्रतिबंधों में ढील दी जा रहरी है। ये छूट इलाकों के आधार पर दी जा रही है, क्षेत्र के आधार पर नही। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के हिसाब से भी फैसले लिये जा रहे हैं। मोबाइल फोन 14 अक्टूम्बर से पूरे कश्मीर में काम करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि श्रीनगर मे 55 जगहों पर इंटरनेट की सुविधा है। अनंत नाग में 41, बारामुला में 35, बांदीपुरा 20 टर्मिनल है जहाँ से इंटरनेट मौजूद है।

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एसजी ने कहा कि याचिका कर्ता अनुराधा भसीन के अखबार के अलावा बाकी सभी अखबार प्रकाशित हो रहे हैं। और वह भी अपना अखबार दूसरी जगह से प्रकाशित कर रही हैं। उन्होंने ये भी कहा कि ट्रांसपोर्ट की सुविधा एक हफ्ते में पूरी तरह से शुरू कर दी जाएगी। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि आज कल अपने पेपर की बजाय हम विदेश की न्यूज़ पर ज्यादा भरोसा कर रहे है। जस्टिस गवई की इस टिप्पणी पर तुषार मेहता ने कहा कि अपने अखबार ज्यादा भरोसेमंद है। यहां की मीडिया ज्यादा जिम्मेदार है और वो हकीकत जानती है। वही आज की सुनवाई समाप्त हो गयी है इसके बाद अब मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी

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