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जानिए प्रोटेम स्पीकर और उनके कर्तव्यों के बारे में

महाराष्ट्र के सियासी ड्रामा पर अदालत ने मंगलवार को यानी आज अपना फैसला सुनाते हुए बुधवार शाम 5 बजे का समय बहुमत परीक्षण के लिए तय किया है। इसका मतलब नवनियुक्त सरकार के पास सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए करीब 30 घंटे का समय है। अदालत ने प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करने का भी आदेश दिया है। प्रोटेम स्पीकर सभी विधायकों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।

क्या होता है प्रोटेम स्पीकर

आइए अब आपको बताते हैं प्रोटेम स्पीकर के बारे में। दरअसल, प्रोटेम स्पीकर उन्हें कहा जाता है, जो चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष का चुनाव होने तक संसद या विधानसभा का संचालन करते हैं। एक तरीके से कार्यवाहक और अस्थायी अध्यक्ष ही प्रोटेम स्पीकर होते हैं। बता दें कि लोकसभा अथवा विधानसभाओं में इनका चुनाव बेहद कम समय के लिए होता है।

वैसे तो सदन के वरिष्ठतम सदस्य को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है। लोकसभा या विधानसभा चुनाव के ठीक बाद अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले अस्थायी तौर पर वे सदन के संचालन से संबंधित दायित्वों का निर्वहन करते हैं। बात करें प्रोटेम स्पीकर के पद की तो प्रोटेम स्पीकर तब तक अपने पद पर बने रहते हैं, जब तक सदस्य स्थायी अध्यक्ष का चुनाव न कर लें।

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आपको ये भी बता दें कि लोकसभा अथवा विधानसभाओं में प्रोटेम स्पीकर की जरूरत तब भी पड़ती है, जब सदन में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों का पद खाली हो जाता है। यह स्थिति तब पैदा हो सकती है, जब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों की मृत्यु हो जाए अथवा वे अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दें। बात करें इनकी शक्तियों की तो संविधान में प्रोटेम स्पीकर की शक्तियां स्पष्ट तौर पर नहीं बताई गई हैं, लेकिन यह तय है कि उनके पास स्थायी अध्यक्ष की तरह शक्तियां नहीं होती हैं।

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