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अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए बढ़ाना होगा इंफ्रास्ट्रक्चर में खर्च

अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार लगातार ये दावा करती है कि आने वाले दिनों में भारत जल्द ही 5 ट्रिल्यन डॉलर (5 लाख करोड़ डॉलर) की इकॉनमी बनने वाला है, लेकिन घटती विकास दर इसमें सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि सरकार ये कहती है कि विकास को रफ्तार देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं और आगे भी इस दिशा में प्रयास जारी हैं।

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर भारत को विकास की रफ्तार 7.5 फीसदी तक पहुंचाना है तो भारत को इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अगले दशक तक 3.3 ट्रिल्यन (3 लाख करोड़) डॉलर खर्च करने की जरूरत होगी।

क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार सड़क निर्माण और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर में जितना खर्च करेगी उतना अच्छा है। मगर यहां सबसे बड़ी चुनौती ये है कि इसमें राज्य सरकार की भी हिस्सेदारी होती है। राज्य सरकार को इन प्रॉजेक्ट्स के कुल बजट में 50 फीसदी देना पड़ता है। ऐसे में केंद्र सरकार को राज्य सरकारों के सहयोग के बिना ये करना संभव नहीं होगा।

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अब यहां जो सबसे बड़ी मुश्किल है वो ये कि पिछले एक साल में बीजेपी के हाथों से कई राज्य निकल चुके हैं। राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार गंवाने के बाद बीजेपी के हाथ से अब महाराष्ट्र भी निकल चुका है। 2017 में बीजेपी का शासन देश के 71 फीसदी भाग पर था जो अब घटकर 40 फीसदी पर पहुंच चुका है। 2018 में बीजेपी और गठबंधन का शासन 21 राज्यों में था, अब देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे के बाद बीजेपी और गठबंधन का शासन 17 राज्यों में ही है।

अर्थव्यवस्था के विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में खर्च को बढ़ाने की ज़रुरत है और ये अकेले केंद्र सरकार नहीं कर सकती। इसके लिए राज्यों का सहयोग बेहद ज़रूरी है। जहाँ तक केंद्र और राज्य के आपसी सहयोग और समन्वय की बात है तो हम देख रहे हैं कि ग़ैर BJP शासित राज्यों से सिर्फ तल्खी और तकरार की खबरें ज़्यादा आती हैं। तो अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सिर्फ सत्ता के लिए राजनीति करने वाली भाजपा विकास की खातिर क्या गैर BJP शासित राज्य सरकारों से सामंजस्य बिठा पाएगी।

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