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बधाई के बहाने सोनिया गांधी और राहुल ने उद्धव ठाकरे को दी ये बड़ी सीख

गुरुवार को उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस दौरन उन्हें कई सारी बधाइयां मिली। वही इन बाद बधाइयों में दो बधाई सबसे खास थी।  कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की।

सोनिया गांधी ने अपने पत्र के पहले पैराग्राफ में नव नियुक्त मुख्यमंत्री को बधाई दी और साथ ही शपथग्रहण समारोह में शामिल न हो पाने पर खेद व्यक्त किया। इसके बाद सोनिया गांधी ने साफ लिखा ” शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस ऐसे बेहद असामान्य हालात में एक साथ आए हैं, जब देश भाजपा की तरफ से अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहा है। राजनैतिक वातावरण जहरीला हो गया है और अर्थव्यवस्था ढह गई है। किसान आफत के मारे हैं।” इसके आगे सोनिया गांधी नए मुख्यमंत्री को याद दिलाती हैं ” शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस एक साझा कार्यक्रम पर सहमत हुए हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि तीनों पार्टियां इस प्रोगाम को अक्षरश: लागू करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रहने देंगी।”

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देश की परिस्थितियों को असामान्य और राजनैतिक माहौल को जहरीला बताने जैसे कठोर शब्दों का प्रयोग शायद ही कभी बधाई पत्रों में किया जाता हो। यही नहीं भाजपा की ओर से देश को अभूतपूर्व खतरे की बात कह कर सोनिया गांधी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यह गठबंधन आपद् धर्म का निर्वाह करने के लि बना है।

जिस तरह की धीर गंभीर भाषा का इस्तेमाल सोनिया गांधी ने किया उससे आगे बढ़कर भाषा का प्रयोग राहुल गांधी ने किया है। राहुल ने भी पहली लाइन में बधाई दी और कार्यक्रम में न आ पाने की बात कही। उसके बाद राहुल ने लिखा, ” महाराष्ट्र में सरकार बनने के पहले के घटनाक्रम ने देश के लोकतंत्र के सामने एक खतरनाक नजीर पेश की है। मुझे खुशी है कि महाराष्ट्र विकास अघाड़ी ने लोकतंत्र को नजरअंदाज करने की भाजपा की कोशिश का जवाब दिया है।” पत्र के अंत में राहुल गांधी ने यह भी लिख दिया कि उन्हें भरोसा है कि गठबंधन सरकार एक सेक्युलर और गरीब हितैषी सरकार साबित होगी।

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राहुल गांधी के पत्र में उन्हीं चुनौतियों को और दृढ़ता से बताया गया जिनका जिक्र सोनिया गांधी ने किया था। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस की परंपरा और देश के संविधान की भावना के अनुसार सेक्युलर  शब्द भी जोड़ दिया।

इन दोनों पत्रों में बधाई से ज्यादा यह दिखता है कि दोनों नेता मुख्यमंत्री को उनका कर्तव्य याद दिला रहे हैं और शायद उन्हें उनके कार्यक्षेत्र का दायरा भी बता रहे हैं।

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