fbpx

GDP : 6 साल में सबसे कमजोर ग्रोथ

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानी सितंबर तिमाही के दौरान देश की GDP ग्रोथ घटकर 4.5 फीसदी पर आ गई है पिछले छह सालों का यह न्यूनतम स्तर है। इससे पहले ही लगभग सभी एजेंसीज और अर्थशास्त्रियों ने ग्रोथ रेट में गिरावट की आशंका व्यक्त की थी। मगर यहां चिंता की बात यह है कि ये दर आशंका से भी नीचे चली गयी है। अनुमान था कि GDP की ग्रोथ रेट 4.7  तक रह सकती है। एक साल पहले की इसी तिमाही में GDP की ग्रोथ रेट 7 फीसदी थी।

मंदी की ये मार चौतरफा है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (SIAM) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर तिमाही में पैसेंजर व्हीकल की सेल्स 23.7 फीसदी घटी है। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ भी 1 फीसदी घट गई है। प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडीचर (PFCE), जिससे हाउसहोल्ड खर्च का पता चलता है, की ग्रोथ सितंबर तिमाही में 5.06 फीसदी रही है। पिछले साल की इसी तिमाही में इसकी ग्रोथ 9.8 फीसदी थी। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन सितंबर में घटकर 4.3 फीसदी रह गया है। पिछले 7 साल में ये सबसे कम पर आ गया है।

ये भी पढ़ें :-  लोकसभा में पेश हुआ नागरिकता बिल, 82 के मुकाबले 293 वोटों से प्रस्ताव स्वीकार

मोदी सरकार के तमाम मंत्री कह रहे हैं कि भारत जल्द ही 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने वाला है। लेकिन अगर हिसाब लगाया जाये तो उसके लिए 12 फीसद से ज़्यादा की ग्रोथ रेट चाहिए। जो फिलहाल कहीं से कहीं तक दिखाई नहीं देती। इसमें सबसे ज़्यादा परेशानी की बात ये है कि कंज्यूमर स्पेंडिंग में तेज़ गिरावट आयी है। लोग खर्च करने में सावधानी बरत रहे हैं या दूसरे शब्दों में कहें तो खर्चों में कटौती कर रहे हैं। ये बेवजह नहीं है, जिस तरह से बाजार में रोज़गार घट रहे हैं ये उसी का परिणाम है। अगर इससे जल्द नहीं निपटा तो ये और गहरा सकता है।

ये एक भंवर की तरह हो सकता है, क्योंकि जॉब के डर से लोग खर्च कम करेंगे तो बाजार में माल कम बिकेगा जिससे मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को कम मुनाफा या घाटा होगा और अपना मुनाफा सुरक्षित करने के लिए कंपनियां कॉस्ट कटिंग करेंगी जिससे और बेरोज़गारी बढ़ेगी। बेरोज़गारी बढ़ने से डिमांड में और कमी आएगी जिससे मंदी और बढ़ेगी यानी अगर एक बार ये चक्र घूमना शुरू कर देता है तो इसे रोकना आसान नहीं होता।

ये भी पढ़ें :-  उन्नाव रेप - सीएम योगी ने कहा आरोपियों को जल्द से जल्द दिलावाएंगे सजा।

मगर हमारी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कह दिया है कि अपने देश में फिलहाल ऐसी कोई समस्या नहीं है, हो भी कैसे सकती है हम मानेंगे ही नहीं, आखिर ये मोदी सरकार है यहां सिर्फ अच्छे दिन होते हैं तो मंदी का तो प्रश्न ही नहीं उठता।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.