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RBI : रेपो रेट स्थिर, GDP ग्रोथ का अनुमान 6.1% से घटाकर 5%

GDP ग्रोथ में लगातार गिरावट है और 6 साल का सबसे निचला स्तर है। इसी के चलते ये कयास लगाए जा रहे थे कि रिज़र्व बैंक एक बार फिर ब्याज दरों में कटौती करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और तीन दिनों की पॉलिसी बैठक के बाद पॉलिसी रेट्स में बदलाव नहीं किया गया है, हालांकि आज Monetary Policy Committee (MPC) के सभी सदस्यों की सहमति पॉलिसी रेट को पहले के लेवल पर बरकरार रखने पर रही। MPC के सभी 6 सदस्यों ने आपसी सहमति से माना कि आगे रेट कट करने की संभावनाएं है। ग्रोथ और महंगाई को देखते हुए MPC ने फिलहाल रेट कट ना करने का फैसला किया है।

इसके अलावा रिज़र्व बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान 6.1% से घटाकर 5% कर दिया है और महंगाई दर का अनुमान 3.5% से बढ़ाकर 3.7% कर दिया है।

RBI ने इससे पहले लगातार 5 बार रेपो रेट में कटौती की थी। इस साल रेपो रेट में 1.35% कमी की जा चुकी है और मौजूदा दर 5.15% है। अगर रेपो रेट और घटाया जाता तो इससे सिस्टम में और तरलता आती जिससे मांग में बढ़ोतरी होती। RBI को इस बार एक चुनौती और थी, वो ये कि inflation जो की लगातार नियंत्रण में था, इस बार उसमें थोड़ी वृद्धि दर्ज़ की गयी है। ऐसे समय में अगर रेपो रेट में और कमी की जाती तो liquidity और बढ़ जाती जिससे inflation और बढ़ सकता था।

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क्या होता है रेपो रेट

वह दर जिस पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों को कर्ज देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। इस दर में कटौती से बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है। जब बैंकों को RBI से सस्ता कर्ज़ मिलता है तो बैंक भी अपने ग्राहकों को सस्ता क़र्ज़ देते हैं। सरल भाषा में कहें तो रेपो रेट में कटौती का सीधा अर्थ है ब्याज दरों में कमी।

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