fbpx

मोदी सरकार की बजट टीम में अभी भी खाली हैं दो प्रमुख अधिकारियों के पद

भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी से जूझ रही है। आये दिन कोई बड़ी एजेंसी नए गिरावट के आंकड़े बताती है। सरकार के मंत्री भी अर्थव्यवस्था को लेकर तरह तरह के बयान देते रहते हैं। मगर सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि सरकार एक तरफ तो अर्थव्यवस्था में सुधार को लेकर उठाये जा रहे कदमों का ढिंढोरा पीटते नहीं थकती मगर अभी तक वित्त मंत्रालय की बजट तैयार करने वाली टीम में दो प्रमुख अधिकारियों के पद खाली हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली  NDA की दूसरी सरकार की दूसरे बजट की तैयारियां भले ही जोरों पर है, लेकिन वित्त मंत्रालय की बजट तैयार करने वाली टीम में दो प्रमुख अधिकारियों की जगह खाली है।

इसमें एक पूर्णकालिक व्यय सचिव शामिल हैं। सरकार की बजट टीम में व्यय सचिव के अलावा संयुक्त सचिव (बजट) का पद भी लगभग तीन महीने से खाली पड़ा है। बजट तैयार करने के लिहाज से इन दोनों अधिकारियों को खासा अहम माना जाता है।

ये भी पढ़ें :-  CAA: नागरिकता के लिए शरणार्थियों को भी देना पड़ेगा धर्म का सबूत, असम में 3 महीने अहम

जी सी मुर्मू की जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल पद पर नियुक्ति के बाद से व्यय सचिव का पद खाली है। उन्होंने 29 अक्तूबर को पद छोड़ा था और तब से अतनु चक्रवर्ती को व्यय विभाग का अतिरिक्त प्रभार मिला हुआ है।

1985 बैच के IAS अधिकारी चक्रवर्ती वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव हैं। निवेश और सार्वजनिक संपदा प्रबंधन (Department of Investment and Public Asset Management – DIPAM) में एक साल के कार्यकाल के बाद चक्रवर्ती को इस साल जुलाई में आर्थिक मामलों का सचिव नियुक्त किया गया था।

वित्त मंत्रालय ने 14 अक्तूबर से 2020-21 के बजट की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पिछले महीने कई विभागों और मंत्रालयों के साथ बैठकें भी हुई हैं। व्यय सचिव एवं अन्य सचिवों और वित्तीय सलाहकारों के साथ चर्चा के बाद ही बजट को अंतिम रूप दिया जाएगा।

अर्थव्यवस्था ढलान पर है और सभी को आगामी बजट में कुछ ठोस और असरदार उपायों की दरकार है। मगर चिंता की बात ये है कि सरकार के मंत्री जिन्हें अर्थशास्त्र का ककहरा भी नहीं पता वो भी अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे पर कुछ भी अनर्गल बयानबाज़ी करते रहते हैं। इसके अलावा इतने अहम विभाग में अधिकारियों के खाली पद भी सरकार की अर्थव्यवस्था के प्रति संजीदगी को दर्शाता है।

ये भी पढ़ें :-  Delhi Election 2020: BJP सांसद प्रवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर की बोलती चुनाव आयोग ने की बंद

सरकार को ये समझना होगा कि ये अर्थशास्त्र है, राजनीति नहीं जहां भाषणों से माहौल बन जाये, भीड़ में कुछ जुमले बोलें, जनता ताली बजाये और हर तरफ फील गुड होने लगे। लच्छेदार और भावुक भाषण सुनकर जनता को लगने लगे की हाँ अच्छे दिन आ गए हैं। अर्थव्यवस्था में अच्छे दिन लाने के लिए अच्छे कदम उठाने पड़ते हैं। अच्छे परिणामों के लिए ठोस उपायों की ज़रूरत होती है सिर्फ बयानबाज़ी की नहीं।

2 total views, 2 views today

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.