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सांसदों ने दी ब्रेग्जिट समझौते को मंजूरी, ब्रिटेन होगा यूरोपियन यूनियन से बाहर

ब्रिटेन की संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ कॉमंस ने यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन(Boris Johnson) के समझौते को गुरुवार को मंजूरी दे दी है। इस समझौते के पक्ष में 330 वोट पड़े जबकि विरोध में 231 वोट डाले गए।

पिछले महीने बोरिस जॉनसन ने ब्रेग्जिट (Brexit) मुद्दे पर ही प्रचंड बहुमत के साथ में सत्ता में दोबारा वापसी की थी। ब्रेग्जिट (Brexit) पर सांसदों की मंजूरी के साथ कई सालों की देरी के बाद ब्रिटेन के 31 जनवरी को यूरोपीय संघ से बाहर निकलने का रास्ता आसान हो गया है।

अभी ‘ईयू-यूके विदड्रॉल एग्रीमेंट बिल(Withdrawal Agreement Bill)’ को हाउस ऑफ लॉर्ड्स (ब्रिटिश संसद का उच्च सदन) और यूरोपीय संसद द्वारा पारित किया जाना बाकी है, जिसे हालांकि इसे केवल औपचारिकता मात्र माना जा रहा है।

ब्रेग्जिट (Brexit) क्या है ?

ब्रेग्जिट (Brexit) का मतलब है ‘ब्रिटेन एग्जिट’ यानी ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलना। साल 2016 में ब्रिटेन में ब्रेग्जिट (Brexit) को लेकर जनमत संग्रह किया गया था। इसमें 50 फीसदी से ज्यादा लोगों का मानना था कि ब्रिटेन को यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलना चाहिए जबकि ब्रेग्जिट के विरोध में राय दी थी।

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ब्रिटेन साल 1973 में 28 सदस्यीय यूरोपीय यूनियन का सदस्य बना था। ब्रेग्जिट (Brexit) के साथ ब्रिटेन की करीब पांच दशक पुरानी सदस्यता खत्म हो जाएगी। ऐसा करने वाला ब्रिटेन पहला देश होगा। हालांकि, ईयू के नियमों के तहत 31 दिसंबर तक वह कारोबार करेगा।

इस साल ब्रिटेन में हुए आम चुनाव में सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी ने जबरदस्त जीत हासिल की। बोरिस जॉनसन की कंजरवेटिव पार्टी को 650 सीटों वाली संसद में 364 सीटें मिलीं। चुनाव परिणाम के साथ ही ब्रेग्जिट (Brexit) का रास्ता साफ हो गया था। इस चुनाव में एक दर्जन से अधिक भारतवंशी उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की थी।

1980 के दशक में मारग्रेट थ्रैचर के दौर के बाद कंजरवेटिव पार्टी की यह सबसे बड़ी जीत रही। चुनावों के नतीजे आने के बाद प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने साफ़ कहा था कि हम यूरोपीय संघ (European Union – EU) से ब्रिटेन को अलग करने वाले ब्रेग्जिट (Brexit) को 31 जनवरी तक हर हाल में पारित कराएंगे। इसका अर्थ है कि 31 जनवरी के बाद ब्रिटेन ईयू (European Union) का हिस्सा नहीं रहेगा।

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