गीजर इस्तेमाल करते हैं तो जरूर पढ़ लें ये खबर, जा सकती है जान

अगर आप ज्‍यादा देर तक गर्म पानी का शावर लेने के आदी हैं तो यह खबर जरा ध्‍यान से पढ़‍िए। मुंबई में गीजर की वजह से मौत का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सभी को चौंका दिया है। यहां पर 15 साल की बच्‍ची की जान बाथरूम में गीजर से निकली जहरीली गैस की वजह से हो गई है। मंगलवार को डॉक्‍टर की तरफ से इस बात की पुष्टि की गई है। यह लड़की 10वीं कक्षा की छात्रा थी और पुलिस का कहना है कि जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन बच्‍ची का जन्‍मदिन था।

गीजर से निकली खतरनाक कार्बन मोनोऑक्‍साइड

मुंबई के बोरीवली की रहने वाली 15 साल की ध्रुवी गोहिल को 10 जनवरी को बाथरूम में फिट गीजर की वजह से उनकी हालत काफी बिगड़ गई थी। इसी दिन ध्रुवी का 16वां जन्‍मदिन भी था। बताया जा रहा है कि गीजर से निकली कार्बन मोनोऑक्‍साइड की वजह से उनके दिमाग में सूजन आ गई थी। गोराई के मंगलमूर्ति हॉस्पिटल में उन्‍होंने दम तोड़ दिया। डॉक्‍टरों ने उनके दिमाग में ऑक्‍सीजन देकर जान बचाने की कोशिश भी की मगर कुछ कारगर साबित नहीं हुआ। पुलिस की ओर से बताया गया गीजर से निकली जहरीली गैस की वजह से उन्‍हें हाइपोएक्सिया हो गया था।\

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रविवार सुबह गई थी बाथरूम में

बाथरूम में लगे गैस गीजर ऑक्‍सीजन की मदद से पानी को गर्म करने का काम करते हैं। अगर बाथरूम में वेंटीलेशन ठीक न हो तो फिर गीजर पूरी ऑक्‍सीजन को कन्‍जूयम कर सकता है। इसकी वजह से व्‍यक्ति कार्बन मोनोऑक्‍साइड लेने लगता है। इसके कारण दिमाग को खासा नुकसान हो जाता है। शनिवार रात को ध्रुवी अपने एग्‍जाम की पढ़ाई में लगी थी। रविवार सुबह करीब 6:45 मिनट पर वह नहाने के लिए बाथरूम में गई थी। उसके अंकल याग्‍नेश परमार ने बताया कि वह अपने बाल धोना चाहती थी और इसमें उसे काफी टाइम लगता था।

ठंड की वजह से बाथरूम का रोशनदान बंद था

उसके माता-पिता को बाथरूम से कोई आवाज जरूर सुनाई दी थी मगर उन्‍होंने ध्‍यान नहीं दिया। सुबह आठ बजे के करीब जब वह कमरे से बाहर नहीं आई तो फिर उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया गया था। जब माता-पिता ने कमरे का दरवाजा तोड़ा तो ध्रुवी बेहोश पड़ी हुई थी। शरीर का दायां हिस्‍सा गर्म पानी की वजह से जल गया था। परिवार का कहना है कि वह पिछले काफी समय से गैस का गीजर प्रयोग कर रहे हैं। हाल में तापमान में गिरावट की वजह से बाथरूम के रोशनदान को बंद कर दिया गया था। मंगलमूर्ति हॉस्‍पिटल के डॉक्‍टर विवेक चौरसिया ने बताया कि ध्रुवी को बेहोशी की हालत में रविवार सुबह अस्‍पताल लाया गया था।

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दिमाग में आ गई थी सूजन

उसे तुरंत ही वेंटीलेटर पर रखा गया जहां पर उसने सांस लेना शुरू किया। वह बाथरूम में करीब 75 मिनट तक थी और इसकी वजह से उसके दिमाग को काफी नुकसान हुआ है। दूसरे दिन तक उसके दिमाग की सूजन काफी बढ़ गई थी और दिमाग में कई जगह अकड़न आ गई थी। डॉक्‍टरों का कहना है कि ठंड के समय में हवा आने की जगह को अक्‍सर बंद रखा जाता है। सीनियर सिटीजंस और सांस के दूसरे मरीजों को इसका प्रयोग कम से कम करने की सलाह दी जाती है।

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