fbpx

Budget 2020: डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए इस चार्ज को हटा सकती है सरकार

केंद्र सरकार सभी डेबिट कार्ड ट्रांजेक्शन (Transaction) पर लगने वाले MDR चार्ज को पूरी तरह से हटा सकती है। डिजिटल ट्रांजेक्शन और कंज्प्शन को बढ़ावा देने के लिए बजट (Budget 2020) में इसका ऐलान किया जा सकता है।

इससे पहले सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1 जनवरी 2020 से रूपे डेबिट कार्ड और यूपीआई से भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस ले लिया है। क्रेडिट या डेबिट कार्ड से पेमेंट पर MDR की रकम तीन हिस्सों में बंट जाती है। सबसे बड़ा हिस्सा क्रेडिट या डेबिट कार्ड जारी करने वाले बैंक को मिलता है। इसके बाद कुछ हिस्सा उस बैंक को मिलता है, जिसकी प्वाइंट ऑफ सेल्स (POS) मशीन दुकानदार के यहां लगी होती है। इसके बाद MDR का कुछ हिस्सा पेमेंट कंपनी को मिलता है।

क्या है एमडीआर (MDR)

MDR- एक तरह की फीस होती है, जो दुकानदार डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर अपने ग्राहकों से लेता है। या दूसरे शब्दों में कहें तो यह डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट की सुविधा पर लगने वाली फीस है। MDR से हासिल रकम दुकानदार को नहीं मिलती है। कार्ड से होने वाले हर पेमेंट के एवज में उसे MDR चार्ज चुकाना पड़ता है।

ये भी पढ़ें :-  हिमांश और अपने रिश्ते पर नेहा का आया रिएक्शन, दिखीं काफी नाराज

डेबिट कार्ड ट्रांजेक्शन पर MDR चार्ज से राहत देने की तैयारी पूरी हो चुकी है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर बजट में ऐलान हो सकता है। इस प्रस्ताव पर सरकार National Payments Corporation of India (NPCI) और RBI के साथ विचार कर रही है।

इससे सरकार पर करीब 2000 करोड़ का सालाना बोझ बढ़ेगा। सरकार इस बोझ को आरबीआई और बैंकों को वहन करने को भी कह सकती है। Rupay और UPI पर से पहले ही ये चार्ज हटाया जा चुका है।

मर्चेंट को ट्रांजेक्शन पर बैंकों को MDR चार्ज चुकाना पड़ता है। फिलहाल 2000 रुपये से कम के ट्रांजेक्शन पर MDR चार्ज नहीं लगता है। जबकि 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर MDR चार्जेज 0.60% है। प्रति ट्रांजेक्शन अधिकतम चार्ज 150 रुपये तय किया गया है। क्रेडिट या डेबिट कार्ड से पेमेंट पर MDR की रकम तीन हिस्सों में बांटी जाती है। सबसे बड़ा हिस्सा क्रेडिट या डेबिट कार्ड जारी करने वाले बैंक को मिलता है।

ये भी पढ़ें :-  दिल्ली : सरकारी स्कूल के हैप्पीनेस क्लास में जाएंगी मिलेनिया ट्रंप,केजरीवाल और मनीष सिसोदिया भी होंगे साथ

इसके बाद कुछ हिस्सा उस बैंक को मिलता है, जिसकी प्वाइंट ऑफ सेल्स (POS) मशीन दुकानदार के यहां लगी होती है। अंत में MDR का कुछ हिस्सा पेमेंट कंपनी को मिलता है। वीजा, मास्टर कार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस प्रमुख पेमेंट कंपनियां हैं।

छोटे दुकानदार को बिल की रकम का अधिकतम 0.40 फीसदी MDR के रूप में चुकाना होता है। दूसरे दुकानदारों के लिए MDR 0.90 फीसदी है।

MDR चार्ज को बढ़ने से रोकने के लिए आरबीआई ने छोटे दुकानदार के लिए प्रति बिल अधिकतम 200 रुपए और बड़े दुकानदारों के लिए अधिकतम 1000 रुपए की सीमा तय कर दी है। क्रेडिट कार्ड पर एमडीआर 0 से 2 फीसदी के बीच हो सकता है।

28 total views, 2 views today

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.