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बीस सालों में पहली बार टैक्स कलेक्शन में गिरावट

इस साल के कॉरपोरेट और इनकम टैक्स कलेक्शन में बड़ी गिरावट दर्ज़ की गयी है। चालू वित्तीय वर्ष(current financial year) का डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन पिछले 20 सालों में सबसे कम रहा है। इस साल का कॉरपोरेट और इनकम टैक्स कलेक्शन पिछले दो दशकों में सबसे निचले स्तर पर रहा है।

देश के आर्थिक ग्रोथ में निरंतर गिरावट आ रही है इसके अलावा सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स रेट में भी कटौती की है। इसी सब के चलते इस साल सरकार का कॉरपोरेट और इनकम टैक्स से मिला रेवेन्यू पिछले 20 सालों में सबसे कम है।

इस वित्तीय वर्ष के लिए 31 मार्च, 2020 तक के लिए मोदी सरकार ने 13.5 लाख करोड़ के डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य रखा था, जोकि पिछले साल के कलेक्शन से 17 फीसदी ज्यादा है। टैक्स डिपार्टमेंट 23 जनवरी तक सिर्फ 7.3 लाख करोड़ ही टैक्स कलेक्ट कर पाया है। यह रकम  पिछले साल की इस अवधि में कलेक्ट की गयी रकम से 5.5 फीसदी कम है।

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पिछले तीन साल का डेटा दिखाता है कि टैक्स डिपार्टमेंट कंपनियों से पहली तीन तिमाही का टैक्स एडवांस में कलेक्ट करके आखिरी तीन महीनों में कुल डायरेक्ट टैक्स का 30-35% हिस्सा कलेक्ट कर लेते हैं। टैक्स अधिकारियों ने बताया है कि उनकी काफी कोशिशों के बाद भी 2019-20 वित्त वर्ष के लिए टैक्स कलेक्शन 2018-19 के 11.5 लाख करोड़ के कलेक्शन से नीचे ही रह सकता है।

अर्थव्यवस्था में सुस्ती और डिमांड में आई गिरावट के चलते कई बिजनेस प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते निवेश और रोजगार में कटौती हुई है। जब बिज़नेस प्रभावित होगा तो उसका असर टैक्स कलेक्शन पर पड़ना लाजमी है। अर्थव्यवस्था में सुस्ती और डिमांड में आई गिरावट की वजह से ही टैक्स कलेक्शन कम हुआ है। इसके अलावा सरकार को धीमी इकोनॉमिक ग्रोथ के बीच इस वित्त वर्ष के लिए अपना ग्रोथ अनुमान 5 फीसदी पर लाना पड़ा है, जो पिछले 11 सालों में सबसे कम है।

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नोटबंदी के बाद इसे (नोटबंदी को) जायज़ ठहराने के लिए तरह-तरह की दलीलें दी जा रही थीं। ये भी कहा गया कि नोटबंदी से करदाताओं(taxpayers) की संख्या में इजाफा हुआ है। अब तक जो लोग कैश का इस्तेमाल करते थे या टैक्स चोरी करते थे वो अब सिस्टम में आ गए हैं। इससे सरकार को कालेधन को रोकने में मदद मिली है साथ ही साथ करदाताओं की संख्या भी बढ़ी है। करदाताओं की संख्या बढ़ने का सीधा अर्थ है कर (tax) में वृद्धि होना। मगर अब जो सूरतेहाल है उसमें ये साफ़ दिखाई पड़ रहा है कि वो सारी बातें भी सिर्फ कोरे जुमले ही थीं।

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