दिल्ली हिंसा: जब पड़ोसियों ने पड़ोसियों को बचाया, तो मारने वाला कहाँ से आया?

देश की राजधानी दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में भड़की हिंसा 1984 में हुए के दंगों से भी खतरनाक है। 1984 में हुए दिल्ली दंगों में तो सिख़ समुदाय टारगेट था। उस वक़्त जो भी कोई सिख़ों को देख रहा था तो उन पर हमला कर रहा था, लेकिन दिल्ली में अभी हाल ही में जो हिंसा भड़की थी। उसमें किसी की पहचान नहीं हो पा रही थी। कौन, किसको मार रहा था, इस बात की जानकारी न तो मारने वाले को थी न मरने वाले को। न जाने कितने लोग तो सिर्फ शक में ही मार दिए गए।

1984 में हुए दंगों में तो सिखों को टारगेट किया जा रहा था, लेकिन इस बार तो हिंदू और मुस्लिम दोनों को मारा गया। इस बार के दंगों में लोग एक दूसरे को मार रहे हैं वो कौन हैं कहाँ से आये हैं इसका पता किसी को नहीं है। 1984 में तो इंदिरा गांधी की हत्या हुई इस वजह से दंगे हुए थे लेकिन अभी जो हिंसा हुई है उसके पीछे क्या वजह है? इसमें क्यों हिंदू और मुस्लिम को मारा जा रहा है? ऐसे अभी और भी कई सवाल हैं जिनका जबाव मिलना अभी बाकी है।

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लोगों के मुताबिक़ पूर्वी दिल्ली में जो हिंसा हुई है उसके सामने 1984 और 1992 के दंगे कुछ भी नहीं हैं। उस वक़्त लोगों ने भाईचारा दिखाया था और सिखों की मदद की थी लेकिन आज लोग एक दूसरे को मारने के लिए तैयार हैं और मारने की वज़ह भी नहीं जानते हैं।

1984 के दंगों में भी इंसानियत का खून किया गया था और आज भी इंसानियत ही मारी गई। 1984 में भी दंगे में तीन दिन चले थे, तब भी शुरुआत में फोर्स नहीं आई थी, इस बार भी यही हुआ। कभी न भूलने वाला मंजर वो भी था और कभी न भूलने वाला मंजर ये भी हो गया। ये कौन लोग हैं, कहां से आते हैं, कहां आते हैं, ये तब भी पता नहीं था और आज भी पता नहीं चला। वे न हिंदू थे, न मुस्लिम थे। उनकी आगे की योजना के बारे में भी नहीं जानते?

जब लोग आपस में भाईचारा दिखा रहे थे एक दूसरे की मदद कर रहे थे तो दंगा करने वाले कहां से आये? और कैसे यह हिंसा इतनी भड़क गयी? कैसे लोगों के पास इतने हथियार आ गए? गौरतलब है कि दिल्ली में हिंसा भड़की थी तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी भारत दौरे पर दिल्ली में मौजूद थे। इतनी कड़ी सुरक्षा के बाद भी कैसे इतनी बड़ी तादात में हथियार देश की राजधानी में आ गए?

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जब दिल्ली पुलिस ट्रम्प की सुरक्षा के लिए तैनात थी तो कैसे दिल्ली में इतनी बड़ी तादात में दंगाई और हथियारों का आवागमन इतनी आसानी से हो पाया? जिन इलाकों में हिंसा भड़की उन इलाकों के लोग खुद को बचा रहे थे। आस पास के लोगों की भी मदद कर रहे थे। तो उन्हें मार कौन रहा था? कैसे इतनी बड़ी संख्या में लोग हिंसा वाले इलाकों में पहुंच गए और दंगे फैला दिए।

दिल्ली में दंगे, पत्थरबाज़ी, आगज़नी की घटना का होना, प्रशासन और दिल्ली पुलिस का उस पर काबू न कर पाना इनकी नाकामी को दिखाता है। बता दें कि दिल्ली हिंसा में 46 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बीते 18 वर्षों में यह देश का तीसरा सबसे बड़ा दंगा है।

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