भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा मवेशी लेकिन पशु पालन कल्याण बोर्ड का बजट मात्र ₹4 करोड़

भारत एक कृषि प्रधान देश है। देश की अर्थव्यवस्था में पशु पालन और कृषि बेहद अहम भूमिका अदा करते है। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत दूध उत्पादन (Milk Production) में, मांस (Meat) और चमड़े (Leather) का निर्यात करने में भी नंबर 1 पर है।

भारत एक मात्र ऐसा देश है जिसमें एक जानवर (गाय) को माता का दर्जा दिया जाता है। जिस देश में गाय को लेकर आये दिन कोई न कोई मुद्दा बना रहता है। उस देश में पशु पालन का बजट जानकार आप हैरान हो जायेंगे। जिस देश में गाय का मांस बेचने के शक में कितने लोगों की जनता मार-मार कर जान ले लेती है। जिस देश में इतनी सख्ती है तो उसमें इतना बजट क्यों? यहां सरकार लोगों पर तो अपना जोर चला सकती है लेकिन खुद कुछ नहीं करना चाहती है।

जिस देश में जानवर उसकी अर्थव्यवस्था में तो बेहद अहम जगह रखते है इसके साथ ही यह वोट पाने के लिए भी बहुत बड़ा मुद्दा है। गाय के नाम पर यहां इलेक्शन जीते जाते हैं वहां पशु पालन का सालाना बजट मात्र 4 करोड़ है।

जब संसद में बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर ने पशुपालन और डेयरी विभाग के राज्यमंत्री संजीव कुमार बालियान से सवाल किया। जब मंत्री ने राज्यसभा को पशु पालन कल्याण बोर्ड (Animal Husbandry Welfare Board) के बजट के बारे में जानकारी दी तो सभी चुप हो गए।

संजीव बालियान ने बताया कि पशु पालन कल्याण बोर्ड का सालाना बजट मात्र चार करोड़ रुपये है। इसी में कर्मचारियों का वेतन दिया जाता है और बाकी सभी काम किये जाते हैं। संजीव बालियान ने कहा कि इसका बजट बढ़ाने के लिए मंत्री गिरिराज सिंह ने भी पत्र लिखा है। बालियान ने सदस्यों से कहा कि आप खुद समझ सकते हैं कि इतने कम बजट में कैसे गौशाला की मदद कर सकते हैं या फिर कितनी एबुलेंस जैसी सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं।

गायों की दशा पर यूपी नहीं दे रहा जानकारी
समाजवादी पार्टी के विशंभर निषाद ने यूपी में ठंड से लाखों गायों के मरने का मामला उठाया। इस पर संजीव बालियान ने कहा कि सरकार से कई बार जानकारी मांगी गई, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया। बालियान ने कहा कि यदि माननीय सदस्य कोई विशेष मामले का उल्लेख करें या किसी गौशाला के बारे में पूछें तो मंत्रालय पशुपालन कल्याण बोर्ड के माध्यम से जांच कराकर जानकारी मंगा सकता है।

यूपी में बीते कुछ समय पहले गाय का मांस बेचने के शक में लोगों ने कई निर्दोष लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी। यहां कि सरकार गाय को लेकर बहुत सतर्क है उनके लिए गौशाला बनवाई है लेकिन गौशाला में सुविधा देने के लिए सरकार के पास बजट नहीं है।

केंद्र सरकार ने भी खड़े किए हाथ
बालियान ने कहा कि सबको पता है यूपी में गायों को लेकर समस्या है। पश्चिमी यूपी में भी परेशानी है। लोग गायों या गोवंश को लेकर परेशान हैं और यह समस्या सभी को पता है। मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के पास पशु पालन कल्याण बोर्ड का बजट बहुत ही थोड़ा सा है। इसके माध्यम से हम गायों के देखभाल में सहायता नहीं कर सकते।

इसके लिए राज्य सरकारों को ही काम करना होगा। यूपी सरकार प्रतिदिन, प्रतिगाय के मुताबिक 30 रुपये देती है। वहीं महाराष्ट्र सरकार 50 रुपये देती है। बालियान ने कहा कि यह काम राज्य सरकारों के स्तर पर ही संभव है।

पूरे भारत में 6500 गौशाला, बिहार में केवल 87

मनोज झा ने गौशाला के बारे में प्रश्न किया, तो बालियान ने कहा कि पूरे देश में 6500 पंजीकृत गौशाला है। जबकि पुरे बिहार में केवल 87 पंजीकृत गौशाला है। उन्होंने गौशाला की सूचना पर भी कहा कि राज्य जानकारी भेज देते हैं और हम सूची बना लेते हैं। यह राज्यों का विषय है।

जिस देश में मवेशियों की सबसे ज्यादा नस्ले पायी जाती हैं और इसकी संख्या भी सबसे ज्यादा भारत में ही हैं। उस देश में कैसे सिर्फ 4 करोड़ रुपये के बजट में पशु पालन हो सकता है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिनकी दिनचर्या का पहला काम गायें माता को खाना खिलाना होता है। यहां हिन्दू प्रधान देश में गायें की पूजा की जाती है। यहां की सरकार सबसे ज्यादा प्राथमिकता गाय को देती है। तो सोचने वाली बात यह है कि उस देश में सिर्फ 4 करोड़ के बजट में कैसे पशु पालन हो सकता है?

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