देशबंदी से अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान को कम करने के लिये नहीं किये गये उपाय, होगा UP बजट से भी ज्यादा नुकसान

देश की अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही है। इस बीच, 21 दिन के लिए देशबंदी घोषणा की गयी है। इस लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था को 120 अरब डॉलर (लगभग 9 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान हो सकता है। यह हिसाब बार्कलेज बैंक ने अपनी एक रिसर्च रिपोर्ट में लगाया है। नुकसान भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के चार फीसदी के बराबर है।

क्या कहा बार्कलेज ने?
बार्कलेज ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि राष्ट्रव्यापी बंदी की कीमत लगभग 120 अरब डॉलर यानी GDP के चार फीसदी के बराबर रह सकती है।’’ कंपनी ने कहा कि केंद्र सरकार की तीन सप्ताह की बंदी से ही 90 अरब डॉलर का नुकसान होगा। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र जैसे कई राज्य पहले ही बंदी कर चुके हैं, उससे भी नुकसान होगा। इसके साथ ही बार्कलेज ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए वृद्धि दर के अनुमान में 1.7 फीसदी की गिरावट कर दी गयी है।

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साथ ही बार्कलेज ने यह भी कहा कि अप्रैल में RBI रेपो दर में 0.65 फीसदी की कटौती करेगा और अगले एक साल में इसमें एक और फीसदी की कटौती की जाएगी। RBI तीन अप्रैल को अगली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के निष्कर्षों का ऐलान करने वाला है।

असंगठित क्षेत्र पर प्रभाव
रिसर्च एंड एडवाइजरी कंपनी एमके के अनुसार, लॉकडाउन होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने के लिये उपाय नहीं किये गये हैं। उसने कहा, ‘‘सरकार बंदी के आर्थिक असर को लेकर अभी तक चुप ही रही है, प्रभाव को कम करने के उपायों को तो छोड़ ही दीजिए।’’ कंपनी ने कहा कि नोटबंदी और माल एवं सेवा कर (GST) की दोहरी मार झेलने वाले असंगठित क्षेत्र पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा। उसने छोटी कंपनियों को सस्ता कर्ज देने, कर्ज का पुनर्गठन करने तथा नकदी हस्तांतरण को सरकार के पैकेज के संभावित उपाय बताया।

उत्तर प्रदेश के बजट से भी ज्यादा का होगा नुकसान
9 लाख करोड़ की रकम यूपी के बजट से काफी अधिक है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने हाल ही में वित्तीय वर्ष 2020-21 का बजट पेश किया था। सरकार ने 5 लाख 12 हजार 860 करोड़ 72 लाख रुपये का बजट पेश किया है। जो उत्तर प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा बजट है।

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