सिर्फ एक महीने की देशबंदी में 75 साल पुरानी स्थिति में आया पर्यावरण

कोरोना वायरस का कहर जितना खतरनाक है लॉकडाउन प्रकृति और पर्यावरण के लिए उतना ही साकारत्मक साबित हुआ है। प्रकृति और पर्यावरण के हालात सुधरे तो हैं लेकिन कोशिशों से नहीं बल्कि मजबूरी में। कुदरत ने खुद ही इंसानों के काम पर रोक लगाकर उन्हीं के लिए खुद को फिर निखारा है। देशबंदी शुरू होने से बाद अब तक पर्यावरण में जिस तरह के बदलाव आ रहे हैं, उसे देखते हुए पर्यावरणविदों ने दावा किया है कि अगले 10 दिन बाद जब देशबंदी खत्म होगी, तब तक कई शहरों की आबोहवा स्विटजरलैंड जैसी साफ और शुद्ध हो चुकी होगी।

देशबंदी में कारखानों और ट्रैफिक के कारण पैदा होने वाले प्रदूषण के साथ आम लोगों की जिंदगी की रफ्तार घटी तो प्रकृति को खुद ब खुद फिर संवरने का मौका मिल गया। पर्यावरण के जानकार दावा कर रहे हैं कि महीने भर में ही प्रदेश का पर्यावरण कई यूरोपीय देशों की तरह साफ और शुद्ध हो गया है। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर क्वालिटी इंडेक्स पर नजर डालें तो कई शहरों के आंकड़े साफ बता रहे हैं कि देशबंदी से पहले वहां प्रदूषण के कारण दमघोंटू हालात थे लेकिन 24 मार्च से 20 अप्रैल के बीच इन शहरों के हालात हर रोज बेहतर के साथ और बेहतर होते जा रहे हैं। यहां तक कि पर्यावरणविद यह तक दावा करने लगे हैं कि अगले 10 दिन तक देशबंदी में कई शहरों की हवा स्विट्जरलैंड का मुकाबला करने लगेगी।

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1.30% बढ़ गई गंगा में ऑक्सीजन
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, नदी के पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा का मानक 6.00 प्रति लीटर है। ऋषिकेश में देशबंदी से पहले 24 मार्च और देशबंदी के दौरान 18 अप्रैल को जो सैंपल लिए गए, उनमें बड़ा अंतर सामने आया है। पहले गंगा में ऑक्सीजन की मात्रा 5.20 प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर 6.50 प्रति लीटर हो गई है।

रसायन विज्ञान के प्रवक्ता के मुताबिक ऑक्सीजन बढ़ी यानी पानी साफ होने से गंगा में जल प्राणियों की संख्या बढ़ेगी। गंगा में पानी को शुद्ध करने वाली महासीर, गोल्डन मछलियों की संख्या भी बढ़ेगी। पानी सिंचाई के लिए उपयुक्त होगा। स्नान करने वाले त्वचा रोगों से बचेंगे।

ओजोन लेयर भी मजबूत
दुनिया के तमाम देशों में औद्योगिक गतिविधियां बंद होने से ओजोन परत में बहुत तेजी से सुधार आया है। एक शोध के अनुसार, ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाली रासायनिक गैसों के उत्सर्जन में भारी कमी होने से ऐसा संभव हुआ है। इसका असर अंटार्कटिका के ऊपर वायुमंडल में भी हुआ है और वायुमंडल में बनने वाला भंवर भी सही जगह पर आने लगा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बदलाव के बाद वर्षा चक्र में भी अच्छा परिवर्तन होने की उम्मीद है।

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क्या होती हैं ओजोन लेयर?
वायुमंडल की पहली परत क्षोभमंडल के ठीक ऊपर पाई जाने वाली ओजोन की होती है जो पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी तक आने से रोकती है। ये पराबैंगनी किरणें इंसानों की आंखों और त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। इसकी कारण से कैंसर तक हो सकता है।

दूसरे विश्वयुद्ध के समय था इतना स्वच्छ पर्यावरण
एक रिपोर्ट के अनुसार, सात-आठ दशक बाद पृथ्वी का वातावरण इतना साफ नजर आ रहा है। पर्यावरणविद डॉ. आलोक खरे के अनुसार, 75 साल पहले जब आबोहवा इतनी साफ हुई थी, तब भी दूसरे विश्वयुद्ध को उसका कारण माना गया था। देशबंदी के कारण अब फिर इतने वक्त बाद धरती के हवा-पानी में इतनी शुद्धता देखने को मिली है।

सरकारों ने नहीं देशबंदी ने कर दिया
कोरोना को रोकने के लिए लागू देशबंदी से प्रकृति को फायदा हुआ है। हवा और पानी को शुद्ध करने के लिए सरकारें सैकड़ों करोड़ का बजट खर्च करने के बावजूद जो काम तमाम सालों में नहीं कर पाईं, वह इस देशबंदी ने कर दिखाया है।

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