राइट्स इश्यू लाएगी रिलायंस, 30 अप्रैल की बोर्ड मीटिंग में होगा निर्णय

मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) कर्जमुक्ति के लिए राइट्स इश्यू लाने पर विचार कर रही है। इस पर अंतिम फैसला बोर्ड बैठक में होगा। RIL ने सोमवार को स्टॉक एक्सचेंज की दी जानकारी में कहा कि 30 अप्रैल को कंपनी की बोर्ड बैठक होगी जिसमें मौजूदा शेयरधारकों को राइट्स के आधार पर इक्विटी शेयर जारी करने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।

राइट्स इश्यू क्या है?
शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए राइट्स इश्यू लाती हैं। इसके तहत कंपनियां अपने मौजूदा शेयरधारकों को ही अतिरिक्त शेयर खरीदने को मंजूरी देती हैं। इसके तहत शेयरधारक एक निश्चित अनुपात में ही शेयर खरीद सकते हैं। यह अनुपात कंपनी तय करती है। शेयरधारक कंपनी की ओर से तय अवधि में ही राइट्स इश्यू के तहत शेयर खरीद सकते हैं। राइट्स इश्यू के जरिए जारी किए जाने वाले शेयर से कंपनी के मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ता है।

RIL की तरफ से शेयर बाजारों को दी गई सूचना में कहा गया है कि गुरुवार को होने वाली बोर्ड बैठक में 31 मार्च 2020 को समाप्त हुई चौथी तिमाही के स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटिड वित्तीय परिणामों को भी मंजूरी दी जाएगी। इसके अलावा कंपनी के शेयरधारकों को दिए जाने वाले डिविडेंड पर भी विचार किया जाएगा। मौजूदा समय में BSE में रिलायंस के 23 लाख शेयर हैं, जिसमें से आधे शेयर मुकेश अंबानी और उनके परिवार के पास हैं। मंगलवार सुबह कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 8.85 लाख करोड़ रुपए था। हालांकि, रिलायंस ने राइट्स इश्यू के साइज और अन्य जानकारी शेयर बाजारों को नहीं दी है।

ये भी पढ़ें :-  ऐप बैन कर भारत ने दिखाया, वो चीन के रवैये के आगे झुकेगा नहीं- निकी हेली

29 साल बाद सार्वजनिक रूप से धन जुटाएगी रिलायंस
RIL इस समय लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपए के कर्ज से जूझ रही है। अगस्त 2019 में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा था कि उनकी कंपनी 18 महीने यानी मार्च 2021 तक पूरी तरह से कर्जमुक्त हो जाएगी। कर्ज से मुक्ति पाने के लिए कंपनी राशि जुटाने की दिशा में हरसंभव प्रयास कर रही है। इस महीने की शुरुआत में RIL के बोर्ड ने नॉन-कन्वर्टेबल डिबेंचर (NCD) के जरिए 25 हजार करोड़ रुपए जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अब राइट इश्यू के जरिए कंपनी 29 साल बाद सार्वजनिक रूप से धन जुटाने की योजना बना रही है। इससे पहले रिलायंस ने 1991 में कन्वर्टेबल डिबेंचर्स के जरिए धन जुटाया था। बाद में इन डिबेंचर्स को 55 रुपए की दर से इक्विटी शेयर में बदल दिया था।

फेसबुक ने की 43,574 करोड़ के निवेश की घोषणा
दिग्गज सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने बीते सप्ताह ही रिलायंस के डिजिटल प्लेटफॉर्म जियो में 43,574 करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की है। इस निवेश के बाद जियो में फेसबुक की 9.9 प्रतिशत हिस्सेदारी हो जाएगी। इसके अलावा रिलायंस ने अपने पेट्रोलियम कारोबार का 20 प्रतिशत हिस्सा सउदी अरब की कंपनी सउदी अरैमको को बेचने का ऐलान किया है। हालांकि, क्रूड की कीमतों और कोरोना संकट को देखते हुए इस सौदे में देरी की संभावना लग रही है।

13,436 total views, 1 views today

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.