कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की कुर्सी पर छाए खतरे के बादल

बिहार के बाद अब दक्षिण भारत में राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है भाजपा के पास दक्षिण भारत में एकमात्र कर्नाटका है जहां पर उसकी मजबूत पकड़ है लेकिन भाजपा की एक मजबूत पकड़ के पीछे मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्प है बीएस येदियुरप्पा की कर्नाटक की राजनीति में बहुत ही अच्छी पकड़ है लेकिन यह सब होने के बाद भी बीएस येदियुरप्पा की कुर्सी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। बीती रात बेंगलुरु में करीब 5 मंत्रियों ने मंत्री सुधाकर के घर में बैठक की, मंत्रियों की इस बैठक में येदियुरप्पा की कुर्सी पर मंडरा रहे बादल के ऊपर भी चर्चा हुई। हालांकि की मुख्यमंत्री येदियुरप्पा किसी भी रूप में कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं है। बीएस येदियुरप्पा की राजनीतिक पकड़ मजबूत होने के कारण साथ ही मुख्यमंत्री पद से न हटने के आगे बीजेपी विवश हो जाएगी। मुख्यमंत्री के पद से उन्हें हटाना बीजेपी के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं होगा। साथ ही इससे पहले कर्नाटक में बीजेपी येदियुरप्पा को हटाकर सियासी हश्र देख चुकी है। तो ऐसे में सवाल यह है कि क्या बीजेपी यह जोखिम भरा कदम उठाएगी?

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येदियुरप्पा की बीजेपी पर पकड़
कर्नाटक में बीजेपी की तरफ से बीएस येदियुरप्पा ही चेहरा माने जाते हैं बीजेपी से में एक अकेले नेता हैं जिन्होंने अपने दम पर कर्नाटक में पार्टी के आधार को मजबूत करने का काम किया। सबसे पहले वो बीजेपी के विधायक 1983 में बने थे और फिर 80 के दशक में बीजेपी की कमान संभाल ली थी। बीजेपी की कमान संभालते हैं उन्होंने पार्टी को संगठनात्मक तौर पर प्रदेश के हर जिले में मजबूत करने का काम किया। कर्नाटक में यह ऐसे नेता थे जिन्होंने किसानों के दिए थे जमकर लड़ाई की है किसानों के मुद्दों को लेकर वे सड़क से विधानसभा तक लड़े हैं। इस तरह के संघर्ष के बाद ही बीएस में भाजपा में अपनी जबरदस्त पकड़ बना ली

कर्नाटक बीजेपी में बगावत का खतरा
अगर कर्नाटक में बीजेपी बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ कोई कदम उठाती है या उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की कोशिश करती है। तो बीजेपी के खिलाफ कर्नाटका में राजनीतिक चिंगारी सुलग सकती है। जब 2011 में बीएस येदियुरप्पा ने भाजपा का साथ छोड़ा था तो उनके साथ काफी बड़े नेताओं ने भी बीजेपी को अलविदा कह दिया था। ऐसे में बीजेपी दोबारा मुख्यमंत्री येदियुरप्पा से बिगाड़ने का जोखिम नहीं उठा सकती। इसके अलावा कांग्रेस और जेडीएस से आए हुए नेताओं पर बीजेपी के दूसरे नेताओं से ज्यादा येदियुरप्पा की पकड़ है। ऐसे में बीजेपी के लिए उनकी घर वापसी की थी एक बड़ी टेंशन है, क्योंकि कांग्रेस और जेडीएस को मिलाकर बीजेपी के आंकड़े के बिल्कुल करीब है। ऐसे में बीजेपी के लिए लिए यह भी एक चिंता का विषय है।

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