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ऋषि पंचमी के दिन ऐसे करें व्रत और पूजन

ऋषि पंचमी का त्योहार भाद्रपद शुक्ल माह की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल ये त्योहार 14 सितंबर को मनाया जा रहा है।

दरअसल इस दिन महिलाएं सप्त ऋषियों की पूजा करती हैं। कहा जाता है ऋषि पंचमी का व्रत सभी वर्ग की स्त्रियों को करना चाहिए। भाद्रपद शुक्ल पंचमी को सप्त ऋषि पूजन व्रत का विधान है।

यह व्रत जाने-अनजाने हुए पापों के पक्षालन के लिए स्त्री तथा पुरुषों को अवश्य करना चाहिए। इस दिन गंगा स्नान करने का विशेष माहात्म्य है इस दिन स्नान कर अपने घर के स्वच्छ स्थान पर हल्दी, कुंकुम, रोली आदि से चौकोर मंडल बनाकर उस पर सप्तऋषियों की स्थापना करते हैं। ऋषि पंचमी के दिन महिलाएं ऋषियों की पूजा कर उनसे धन-धान्य, समृद्धि, संतान प्राप्ति तथा सुख-शांति की कामना करती हैं।

जानें कैसे करें व्रत

* प्रातः नदी आदि पर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।

* तत्पश्चात घर में ही किसी पवित्र स्थान पर पृथ्वी को शुद्ध करके हल्दी से चौकोर मंडल (चौक पूरें) बनाएं। फिर उस पर सप्त ऋषियों की स्थापना करें।

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* इसके बाद गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से सप्तर्षियों का पूजन करें।

* मंत्र का जाप करें

* अब व्रत कथा सुनकर आरती कर प्रसाद वितरित करें।

* तदुपरांत अकृष्ट (बिना बोई हुई) पृथ्वी में पैदा हुए शाकादि का आहार लें।

* इस प्रकार सात वर्ष तक व्रत करके आठवें वर्ष में सप्त ऋषियों की सोने की सात मूर्तियां बनवाएं।

* तत्पश्चात कलश स्थापन करके यथाविधि पूजन करें।

* अंत में सात गोदान तथा सात युग्मक-ब्राह्मण को भोजन करा कर उनका विसर्जन करें।

ऐसे करें पूजा

घर में साफ-सफाई करके पूरे विधि विधान से सात ऋषियों के साथ देवी अरुंधती की स्थापना करती हैं। सप्त ऋषियों की हल्दी, चंदन, पुष्प अक्षत आदि से पूजा करके उनसे क्षमा याचना कर सप्तऋषियों की पूजा की जाती है। पूरे विधि- विधान से पूजा करने के बाद ऋषि पंचमी व्रत कथा सुना जाता है तथा पंडितों को भोजन करवाकर कर व्रत का उद्यापन किया जाता है।

 

 

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