Ganesh Chaturati special : लोगों के घर विराजे गणपति बप्पा 

गणेश जी जिन्हें हम गणपति बालगणपति,गजानन, मंगलमूर्त्ति और बप्पा जैसे कई अनेक नामो से बुलाते हैं। गणपति बप्पा हर किसी के ज़िन्दगी में अलग- अलग रूपों में साथ निभाते हैं किसी की ज़िन्दगी में दोस्त के रूप में मदद करते हैं , तो किसी की ज़िन्दगी में भाई की भूमिका निभाते हैं तो वही दूसरी ओर किसी के लिए उनके मां-बाप के समान होते हैं हमारे गणपति बप्पा। इस कारण उनके सम्मान और स्वागत के लिये गणेश जी के जन्मदिवस के रुप में इसे मनाया जाता है। पूरे देश में आज यानि 13 सितम्बर को गणेश चथुर्ति का आगाज़ हो गया हैं।  आज हर घर में गणपति बप्पा विराजमान हो गए हैं। हर मंदिर और घरों में गणेश जी पधारेंगे। वही लोगो ने भी उत्सव की पूरी तैयारी कर ली है। इसके साथ ही आज के दिन कई सारे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। इन सांस्कृतिक कार्यक्रम में गायन, चित्रकला, भजन संध्या जैसे प्रतियोगिताएं भी शामिल होंगी। आज के शुभ दिन पर मंदिरों में भी काफी सारे विशेष इंतजाम हो रहे हैं। कई लोग घरों में भी गणपति बप्पा की स्थापना करेंगे। चौराहों पर मूर्तियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।ये उत्सव भाद्रपद के महीने में शुक्ल पक्ष में चतुर्थी पर शुरु होता है और 11वें दिन अनन्त चतुर्दशी पर खत्म होता है।

ये कहना गलत नहीं होगा कि गणेश चतुर्थी सबसे प्रसिद्ध त्योंहारो में से एक त्योहार है। गणेश चथुर्ति को हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा हर साल बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। इतना ही नहीं ऐसा माना जाता हैं कि बड़ो से ज़्यादा बप्पा बच्चों को बहुत पसंद करते है और गणेश चथुर्ति के शुभ पर्व पर उनकी पूजा करके बुद्धि तथा सौभग्य का आशीर्वाद प्राप्त करते है।

लोग इस पर्व की तैयारी एक महीने पहले, हफ्ते या उसी दिन से शुरु कर देते है। इस उत्सवी माहौल में बाजार अपनी पूरी लय में रहता है। ऐसा देखा जाता है कि हर जगह दुकानें बप्पा की मूर्तियों से भरी रहती है और लोगों के लिये प्रतिमा की बिक्री को बढ़ाने के लिये बिजली की रोशनी की जाती है।

गणेश चथुर्ति मनाने का कारण काफ़ी दिलचस्प हैं। असल में हुआ यूं कि माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वारपालबना दिया। लेकिन जब शिवजी ने प्रवेश करना चाहा तब बालक ने उन्हें रोक दिया। इस पर शिवगणोंने बालक से भयंकर युद्ध किया परंतु संग्राम में उसे कोई पराजित नहीं कर सका। अन्ततोगत्वा भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सर काट दिया। इससे भगवती शिवा क्रोधित हो उठीं और उन्होंने प्रलय करने की ठान ली। भयभीत देवताओं ने देवर्षिनारद की सलाह पर जगदम्बा की स्तुति करके उन्हें शांत किया। शिवजी के निर्देश पर विष्णु जी उत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव का सिर काटकर ले आए। बता दे कि वो जीव हाथी का बच्चा था। मृत्युंजय रुद्र ने गज के उस मस्तक को बालक के धड पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया। माता पार्वती ने हर्षातिरेक से उस गजमुखबालक को अपने हृदय से लगा लिया और देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया। ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस बालक को सर्वाध्यक्ष घोषित करके अग्रपूज्यहोने का वरदान दिया। भगवान शंकर ने बालक से कहा-गिरिजानन्दन! विघ्न नाश करने में तेरा नाम सर्वोपरि होगा। तू सबका पूज्य बनकर मेरे समस्त गणों का अध्यक्ष हो जा। गणेश्वर!तू भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा के उदित होने पर उत्पन्न हुआ है। इस तिथि में व्रत करने वाले के सभी विघ्नों का नाश हो जाएगा और उसे सब सिद्धियां प्राप्त होंगी। कृष्णपक्ष की चतुर्थी की रात्रि में चंद्रोदय के समय गणेश तुम्हारी पूजा करने के पश्चात् व्रती चंद्रमा को अ‌र्घ्यदेकर ब्राह्मण को मिष्ठान खिलाए। तदोपरांत स्वयं भी मीठा भोजन करे। वर्षपर्यन्तश्रीगणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

हम आशा करते हैं कि इस गणेश चथुर्ति आप सबके सारे दुःख और संकट गणपति जी हरण करले और आपका जीवन खुशियों से भरदे। आप सभी को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं।

 

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