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भय को दूर करने के लिए ऐसे करे माँ कालरात्रि की आराधना

माँ दुर्गा का सातंवा स्वरूप माँ कालरात्रि है। ये अपनी शक्तियों से दुष्टों का नाश करती हैं। इनका नाम कालरात्रि इसलिए पड़ा क्योंकि ये विनाशिका हैं। इनकी चार भुजाएं हैं और विशाल केश हैं। यह वर्ण और वेश में अर्द्धनारीश्वर शिव की ताण्डव मुद्रा में नजर आती है। इनकी आंखों से आग बरसती है। इन्होंने एक हाथ में शत्रुओं की गर्दन पकड़ी है और दूसरे में खड़क तलवार। ये अपने हाथ में चक्र, गदा, तलवार, ढाल, बाण, धनुष, पाश और तर्जनी मुद्रा धारण किए हुए हैं और माथे पर चन्द्रमा का मुकुट धारण किए हैं। 

इनकी सवारी गधर्व यानी गधा है। माँ कालरात्रि की अपने भक्तों पर असीम कृपा रहती है और उन्हें वह हर तरफ से रक्षा ही प्रदान करती है। 

कैसे करें माँ कालरात्रि का पूजन:-

  • सर्वप्रथम साफ और स्वच्छ कपड़े पहन कर कलश पूजा करें।
  • सभी देवताओं की पूजा करें और फिर माँ कालरात्रि की पूजा करें।
  • माँ को लाल चम्पा के फूल अर्पित करें। इससे माँ प्रसन्न होती हैं।
  • प्रसाद में दूध, खीर या अन्य मीठे प्रसाद का भोग लगाएं।
  • लाल चन्दन, केसर, कुमकुम आदि से तिलक लगाएँ। अक्षत चढ़ाएं और अगरबत्ती आदि लगाएँ।

मंत्र:-

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा। 

वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

तांत्रिक नवरात्र के इस सातवें दिन का इंतज़ार करते है। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। इनकी कृपा से किसी भी प्रकार का कोई भय नहीं होता है। सप्तमी की रात्रि को सिद्धियों की रात भी कहा जाता है।

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