नीतीश का इस्तीफा- शह और मात का खेल...

  • नीतीश का इस्तीफा- शह और मात का खेल...

Editor- Sarvesh Shukla

On 2017-07-27 10:57:29 246

“एक पुरानी कहावत है सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे” राजनीति के पुराने खिलाड़ी नीतीश कुमार ने भी कुछ इसी तर्ज पर इस्तीफा दिया है, भूतकाल, वर्तमान और भविष्य पर गौर करें तो ये बात बहुत पहले से साफ थी कि लालू और नीतीश का तथाकथित गठबंधन महज एक मजबूरी है और इसके सिवा कुछ भी नहीं...

 

 

भूतकाल- जब बीजेपी को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए बना था “जनता परिवार”

 

दरअसल 2015 का बिहार चुनाव एक खास रणनीति के साथ लड़ा गया था। जिसे नाम भी खास ही दिया गया था। नाम था “जनता परिवार”  जिसमें जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रिय जनता दल, समाजवादी पार्टी, जनता दल सेक्यूलर, इंडियन नेशनल लोकदल, और समाजवादी पार्टी (राष्ट्रिय) शामिल थे। इस जनता परिवार का एक ही मकसद था और वो था किसी भी हाल में बीजेपी को बिहार की सत्ता पर काबिज़ ना होने देने का। और हुआ भी यही कांग्रेस का अस्तित्व तो बिहार से गायब ही था, बची बीजेपी तो उसे जनता परिवार ने मिलकर बिहार से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

 

80 सीटों के साथ लालू की पार्टी आरजेडी ने सबसे मजबूत दावेदारी पेश की, उसके बाद 71 सीटों के साथ नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का खेमा था, और बीजेपी मात्र 53 सीट ही जीत पाई थी। अब यहां से शुरु होता है जनता परिवार का खेल जिसमें आरजेडी और जेडियू ने अपने बाकी एलाइंस के साथ मिलकर बिहार की सत्ता हांसिल की और नीतीश कुमार की साफ छवि को देखते हुए उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री घोषित कर दिया।

 

 

वर्तमान-  नीतीश ने लालू से तोड़ा महागठबंधन, और टूट गया बिहार का जनता परिवार

 

26 जुलाई की शाम को अचानक ही नीतीश कुमार ने लालू की पार्टी आरजेडी से गठबंधन तोड़ते हुए सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। दरअसल, नीतीश का कहना था कि वो पार्टी पर किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप सहन नहीं करेंगे। और हाल ही के दिनों पर गौर किया जाए तो साफ है कि बिहार के उपमुख्यमंत्री और लालू के बेटे तेजस्वी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। लेकिन क्या ये मानना सही होगा की नीतीश ने तेजस्वी पर लगे आरोपों की वजह से इस्तीफा दिया है, तो जनाब इसका सीधा सा जवाब है नहीं क्योंकि हाल ही में देखा गया है कि नीतीश का झुकाव बीजेपी की तरफ जा रहा है, ऐसे में उन्हें महागठबंधन को तोड़ने के लिए कोई न कोई बहाना तो ज़रूर चाहिए था, तो लो भाई साहब तेजस्वी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को ही सहारा बना लिया।

 

 

भविष्य- 2019 के आम चुनाव में नीतीश को चाहिए बीजेपी का साथ

 

इतना तो सभी जानते हैं कि एक आदमी दो नावों पर सवार नहीं हो सकता, ऐसे में 2019 के आम चुनावों में नीतीश को देश भर में बीजेपी का जनाधार बेहद मजबूत दिखाई दिया, तो उन्होंने बिहार के जनता परिवार या यूं कहें की लालू के साथ किया महागठबंधन तोड़ कर बीजेपी का हाथ थाम ही लिया है।

 

आपको बता दें की सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद 24 घंटे के अंदर नीतीश एक बार फिर बिहार की सत्ता पर काबिज़ होने जा रहे हैं, 27 जुलाई यानी आज वो करीब 11 बजे सीएम पद की शपथ और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उधर तेजस्वी और लालू को समझ नहीं आ रहा कि आखिर ये हो क्या रहा है। तेजस्वी ने राज्यपाल से मिलने का समय भी मांगा है लेकिन अगर नीतीश कुमार और सुशील मोदी शपथ ले लेते हैं तो तेजस्वी का राज्यपाल से मिलने का कोई मतलब नहीं रहेगा।

 

उधर बीजेपी के नायक पीएम नरेंद मोदी भी नीतीश के शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बनने के लिए पटना पहुंच सकते है। तो इसे कहते हैं राजनीति सांप भी मर गया और लाठी भी मजबूत हो गई।