"मोदी लाल" के हसीन सपने

Editor- Sarvesh Shukla

On 2017-09-14 15:17:12 300

समझ समझ के समझ को समझो,समझ समझना भी एक समझ है,समझ समझ के जो ना समझे ,इस समझ में वो न समझ है
 
मेरा देश बदल रहा है,प्रगति की रह पर चल रहा है,क्रांति की नयी परिभाषा लिख रहा है मेरा देश अब बदल रहा है। सरकार बदलने के बाद देश को इन्ही सपनो का आसरा देकर रोज़ नए सवेरे की आस आम लोगो में लगातार जगाई जा रही है। सरकार का हर नेता अपनी बात को सर्वोपरि रखने की हिमायत कर रहा है और विपक्ष मुद्दा विहीन नज़र आता है। ये कौन सा दौर है ,ये देश का कौन सा काल है जो कही सवेरा तो नहीं अँधेरी रात की झिलमिलाहट बिखेरी जा रहा है, आज कल के हालत पर तो बुद्दिजीवी यही कहने पर विवश है। हम ऐसा क्यों कह रही है उसके लिए कुछ तस्वीरों का सहारा लेना अब जरुरी है। 
 
पहली वो तस्वीर जो बुलेट ट्रैन के सपनो को साकार होते हुए दिखी जा है ,जापान के मुखिया से हिन्दुस्तान के प्रधान नेता जब बाहे फैला कर मिले तो दोस्ती के नए आयाम का नज़ारा खूब दिखा तो वही रोड शो से हिन्दुस्तान में सुरक्षा पर भी विदेशियो की बदलती सोच भी सामने आ गयी लेकिन इन सब के ऊपर तेज़ रफ़्तार से दौड़ती हुई बुलेट ट्रैन की तस्वीर पुरे हिन्दुस्तानियो के मन में उत्साह भर देती है। अब एक वो तस्वीर भी देखिये जो साधारण रफ्तार से चलती ट्रैन भी देश में सही तरह से पटरी पर नहीं दौड़ पा रही है पिछले कुछ दिनों में रेल और उसके मंत्रालय के तो कुछ यही हालत चल रहे है। इस डिपार्टमेंट का मुखिया बदल गया पर रेल की दशा अभी भी वैसी ही है। तो क्या सपनो की जिद्द को पूरा करने से पहले हमे अपने बुनियादी नीव के सुधार पर काम नहीं करना चाहिए। इस पर सोचना बहुत ज़रूरी है लाखो करोड़ के बजट से आने वाली सपनो की बुलेट ट्रैन की जितनी आवश्यकता है उल्टी ही हमारे अपनों की सुरक्षा भी ज़रूरी है। 
 
चलिए अब कुछ और तस्वीर पर भी गौर देते है। आज देश के कुछ हिस्से में 80 के पार पेट्रोप पहुँचा हुआ है सभी अपनी अलग अलग राय दे रहे है कुछ इलाको में विरोध भी हो रहा है,तो कही कही पर मज़बूरी की परिभाषा बताई जा रही है इन सब के बीच में हम आप का ध्यान कुछ एक तस्वीरों की ओर ले जाना चाहे गे,2014 से पहले की ये वो तस्वीर है जिसमे आज के गृह मंत्री ,वित्त मंत्री और विदेश मंत्री महंगाई डायन का सभी जगह विरोध कर रहे थे,समझाया जा रहा था पेट्रोल डीजल के दाम जब तक बड़े गे तब तक महगाई यो ही भागेगी और जनता बेहाल होगी अब दिखिए आज की तस्वीर पेट्रोलियम मंत्री बढ़ते दामों से दुखी तो है पर वो बार बार वित्त मंत्रालय की तरफ इशहरा कर के ये ज़रूर बता रहे है इसको रोकने का अगर कोई तरीका है तो वो अरुण जेटली के पास है क्योकि राज्यों और केन्द्रीय टैक्स से जो बोझ जनता पर पड़ता है उससे निजाद वित्त मंत्रालय से ही मिल सकती है। गौरतलब है पैट्रोल और डीज़ल पर राज्य अगल अलग लगभग 30 से 40 प्रतिशत का टैक्स लगाते है। आज सरकार की वही मज़बूरी है जिसपर बीजेपी कभी विपक्ष में रहते हुए सड़को पर आंदोलन करती थी क्या सरकार में आने से पहले की करनी और सरकार बनने के बाद की कथनी में अंतर ज़रूरी है। 
 
ऐसी कई और तस्वीर भी है जिस पर नज़र डाले तो कई अंतर और भी दिखेगे जैसे विपक्ष के नेता के तौर जब अरुण जेटली बीजेपी की भाषा को राज्य सभा में रखते थे तो जी एस टी का विरोधी सुर सबसे पहले दिखता था पर आज वही नेता उसका सबसे बड़ा हिमायती है। ये वो आकड़े है जो समाज को निष्कर्ष वादी सोच की ओर  ले जाने के लिए जरुरी है किन्तु हिन्दुस्तान का इतिहास रहा है जब जब किसी सोच से जी डी पी घटी है देश में महगाई बड़ी है तब तब  खात्मे के लिए विपक्ष की अहम् भूमिका रही है। तस्वीर तो यहाँ भी साफ़ है विपक्ष विदेश में तो बोल सकता है पर भारतीय सड़को से सरकारी कानो तक अपनी आवाज़ पहुंचने का उसे कोई तरीका नहीं मालूम है। तभी तो हम कह रहे है ये देश बदल रहा है। क्योंकि सपनो की अँधेरी छाव में सभी को एक उम्मीद के दीपक की रौशनी सरकार जरूर दिखा रही है पर हकीकत की दुनिया को दिखने वाला विपक्ष विदेश में अपने बयानों से अपनी छवि सुधार कर सत्ता के गलियारे तलाशने में लगा है। समझना हमे और आप को है कि आखिर हम किस ओर जा रहे है। हम तो बस अब यही उम्मीद कर सकते है कि जल्दी कोई फ़िल्मी दुनिया का खान पीपली लाइव जैसी फिल्म से हमे झगझोर कर के बताये गा कि मेरे साईया बहुत ही कमात है पर महगाई डायन खाये जात है।