MOVIE REVIEW : जाने कैसी है फिल्म मनमर्जियां की कहानी !

मनमर्जियां तनु वेड्स मनु का इंप्रोवाइज्ड वर्जन लगती है। अब जब तनु वेड्स मनु दर्शकों को खूब पसंद आई थी, तो मनमर्जियां का भी हाल सोच लीजिए। एक तरफ लड़की है। उसका गैरजिम्मेदार ब्वॉयफ्रेंड है। जो शॉर्ट टेंपर्ड भी है। दूसरी तरफ लड़की की अरेंज मैरिज है। और जिससे यह होनी है वो लड़का लंदन रिटर्न है। कूल है। पेशेंस वाला है। फिल्म को सीधे-सीधे दो पार्ट में बांट दिया गया है। पहले पार्ट में तापसी पन्नू यानी रूमी को अपने डीजे ब्वॉयफ्रेंड विक्की (विक्की कौशल) के साथ इश्क फरमाते दिखाया गया है। और इंटरवल के बाद लंदन रिटर्न बैंकर रॉबी (अभिषेक बच्चन) के साथ उनका हौले-हौले पनपता इश्क है। विक्की के साथ रूमी के इश्क में एक आवारापन है, बेपरवाही है। लेकिन रूमी ने हमेशा से विक्की से जिम्मेदारी की आशा लगा रखी है। लेकिन विक्की हर जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहता है। वहीं लंदन रिटर्न बैंकर रॉबी में जिम्मेदारी और समझदारी कूट-कूट कर भरी है। ऐसे में एक प्रेम-त्रिकोण बनता है। दोनों ही किरदारों के बीच तापसी पन्नू को यूं गढ़ा गया है कि जैसे दर्शक फिल्म देखते हुए मनु शर्मा से तनुजा त्रिवेदी की शादी के लिए दुआ मांगने लगते थे, इस फिल्म में भी वे वैसा ही कर रहे होते हैं। लेकिन इस प्रेम त्रिकोण की उठा-पटक, पहले की फिल्मों से दो कदम आगे निकली है। आखिरी में तापसी पन्नू की जोड़ी किससे बनती है ये तो आप सिनेमा के पर्दे पर ही देखें तो अच्छा।

वैसे अब फिल्मों में एक सुंदर बात देखने को मिलने लगी है। कलाकारों का झूठ बोलकर रिश्ते बिगाड़ लेने वाला दौर चुक गया है। और जहां वे सच नहीं बोल पाते, वहां चुप रह जाते हैं लेकिन झूठ नहीं बोलते। ऐसे में अब सारे किरदार अक्सर रुपहले पर्दे पर सच बोलते दिखते हैं और उनके रिश्ते झूठ पर खड़े होकर टूट जाने के बजाए सच की डोर थामे कॉम्प्लीकेटेड होते चले जाते हैं। जिससे दर्शकों को नाटकीयता का एक नया टेस्ट भी मिल रहा है। और इस बात की सीख भी झूठ बोलने से अच्छा है सच बोल दो। तापसी ऐसे ही सच बोलकर फिल्म की कहानी को कॉम्प्लीकेटेड बनाए रखती हैं।

फिल्म में विक्की कौशल ने अपने किरदार को बेहतरीन निभाया है। म्यूजिक की बीट पकड़ने वाले किरदार से लेकर अपने आउटलुक और डांस सभी पर उन्होंने बहुत काम किया है। वहीं अभिषेक शांत-सहज रहते हुए भी हावी रहे हैं। यही उनके किरदार की डिमांड भी थी। तापसी पन्नू ने दोनों के बीच अपने कलर्स को नहीं छोड़ा है। फिल्म में एक जुड़वा धमाका भी है। अमेरिकन-इंडियन परफॉर्मर प्रियंका और पूनम। ये दोनों ही बहनें जब-जब स्क्रीन पर दिखाई देती हैं, दर्शकों की आंखों में चमक देखी जा सकती है। इनका किरदार नाटकों के सूत्रधार सा है। ऐसा लगता है फिल्म की पूरी कहानी में वे किरदारों को देखती मौजूद हैं। यह एक जबरदस्त कलात्मक प्रयोग है। आपको भी स्क्रीन पर पूनम और प्रियंका को देखकर अच्छा लगेगा।

निस्संदेह अनुराग कश्यप भारतीय फिल्मों में म्यूजिक के अहम रोल को समझते हैं। इस बार म्यूजिक है अमित त्रिवेदी का। अमित त्रिवेदी का म्यूजिक फिल्म को और ऊंचा उठाता है। फिर से एक बार फिल्म को आरती बजाज ने एडिटिंग के अपने हुनर को साबित किया है। कॉस्ट्यूम और प्रोडक्शन में मेघना गांधी और प्रशांत सावंत का काम भी बेहतरीन है। तभी अमृतसर कभी कोई दूसरा शहर नहीं लगता। बल्कि उसकी सुंदरता और उभर आती है। सिल्वेस्टर फोंसेका की बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी भी इस फिल्म में रस बढ़ा देती है।

डायरेक्टर अनुराग कश्यप की बात करें तो वे इस फिल्म से चैंपियन बनकर उभरते हैं। हालांकि वे कोई नया सब्जेक्ट नहीं लेकर आए हैं। लेकिन एक सर्वकालिक सब्जेक्ट को उन्होंने इतने बेहतरीन ढंग से पेश किया है कि मज़ा आ जाता है। लेकिन एक बात जरूर है, फिल्म में जो प्रेम अमृतसर में पलता-बढ़ता दिखाया गया है, वैसा आज भी दिल्ली-मुंबई में ही संभव है। हालांकि इसकी पूरी आशा है कि जल्द ही ये प्रेम अमृतसर भी पहुंचेगा। अनुराग कश्यप ने फाइनली बिना खून बहाए एक फिल्म बना ली है।

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