सामने आई मोदी सरकार की तानाशाही, सवाल पूछने वाले न्यूज़ चैनलों की आवाज दबाने की कोशिश

पत्रकारिता और पत्रकारों को देश का चौथा स्तंभ कहा जाता है। सत्ता में बैठे ताकतों के सामने जनता के सवालों को रखना ही पत्रकारिता का कर्तव्य है। आम तौर पर पत्रकार सरकार की नीतिओं की आलोचना करती है, उनकी नीतियों पर सवाल उठती है। मगर जब पत्रकार सरकार की तीखी आलोचना और कड़े सवाल करने लगते हैं तो ये सत्ताधारी ताकतों को रास नहीं आता। ऐसे में अपनी ताकतों का फायदा उठा सरकार पत्रकारों का मुह बंद करने की कोशिश करती है।

हमारे देश का मौजूदा हाल भी ठीक कुछ इसी तरह का है। हमारे देश में कुछ ऐसे न्यूज़ चैनल है जो हमेशा से ही मौजूदा सरकार की नजरों में खटकते रहतें है। और इस कड़ी में अब सरकार इन न्यूज़ चैनलों की आवाज़ को दबाने में लगी हुई है।

एबीपी न्यूज़ पर प्रसारित होने वाला चर्चित प्राइम टाइम शो मास्टर स्ट्रोक आज कल जनता के बीच बेहद ही लोकप्रिय हो रहा है। इस शो में वरिष्ट पत्रकार पुण्यप्रसून वाजपेयी अक्सर कुछ ऐसे तीखे मुद्दे उठाते है जिससे राजनितिक गलियारों में हलचल पैदा हो चुकी है। तीखे सवालों वालों कोई कार्यक्रम जब आम जनता के बिच लोकप्रिय होने लगता है तो सत्ताधारियों के दिलों में डर बैठ जाता है कि सवालों की आड़ में ये न्यूज़ चैनल उनकी पोल न खोल दें। ऐसे में वो इन न्यूज़ चैनलों की आवाज दबाने या किसी भी तरह से इसे जनता तक पहुचने से रोकने की कोशिश करते हैं।

कुछ दिनों से ये शिकायत आ रही है की देश में पुण्यप्रसून वाजपेयी का कार्यक्रम मास्टर स्ट्रोक लोग नहीं देख पा रहे हैं या ठीक से नहीं देख पा रहे हैं। यानी चैनल के प्रसारण के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। या तो उसे पूरी तरह से ब्लैक आउट किया जा रहा है या फिर वह दिख भी रहा है तो वैसा नहीं जैसा रोज दिखता है।

ठीक ऐसी ही कोशिश न्यूज़ चैनल एनडीटीवी के साथ किया जा रहा है। एनडीटीवी हमेशा से ही केंद्र सरकार और सत्ताधारियों से ऐसे सवाल पूछते आई है जिससे ये चैनल सत्ताधारियों की आखों में कांटो के तरह चुभने लगी है और अब वो एनडीटीवी को दबाने में लगे हुए हैं। देश के बहुत सारे हिस्सों में लोग हिंदी एनडीटीवी नहीं देख पा रहे हैं। जिससे ये अनुमान लगाया जा सकता है कि उसे साज़िशन जनता की निगाहों से गायब किया जा रहा है। ताकि जनता तक उसकी बात ना पहुंच सके।

एबीपी और एनडीटीवी चैनलों को तकनिकी खराबी का कारण दे कर रोक दिया जा रहा। जिससे ऐसा लग सके की इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं, गड़बड़ी सिर्फ और सिर्फ केबल ऑपरेटर की है और केबल ऑपरेटर से कौन लड़ने जाए। मगर इसके पीछे सरकार की बड़ी साजिश किसी के सामने नहीं आ पा रही।

जहां एक तरफ एबीपी और एनडीटीवी चैनलों को लोग ठीक से नहीं देख पा रहे वहीं दूसरी ओर आज तक, ज़ी न्यूज़ और बाकि अन्य चैनल बिना किसी गड़बड़ी के बिलकुल ठीक चल रहे है। सिर्फ दो न्यूज़ चैनलों का टीवी पर ठीक से ना चलना कई सवाल खड़े करता है।

देश में न्यूज़ चैनलों की आवाज़ को जनता तक पहुंचने से रोकना पत्रकारिता पर बड़ा हमला है। ये एक अघोषित आपातकाल की तरह है जिसमे बिना कोई चेतावनी दिए मीडिया को प्रसारित करने से रोका जा रहा है। सरकारी ताकतें मीडिया की आवाज दबाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि जनता को बस वही दिख सके जो सरकार चाहती है।

ये देश के लिए एक दुखद घटना है जिसपर कोई भी कुछ नहीं कर सकता। बस टीवी के सामने बैठ के सरकार की वाहवाही देखने को मिलेगी। सरकार पर सवाल उठाने वाला कोई नहीं रहेगा। सरकार सिर्फ अपने मन की बात सुनाएगी, जनता के मन की बात सुनाने वाला कोई नहीं बचेगा। सरकार अपनी नीतियां लाती रहेगी और जनता को उसपर ना चाहते हुए भी अमल करना पड़ेगा, क्यों? क्योंकि देश में जनता के सवाल उठाने वाला कोई नहीं बचेगा। बचेगी तो सिर्फ सरकार, ‘एक तानाशाह सरकार’

Sourav Shukla

Sourav Shukla is an Indian Journalist. He is an alumni of ISOMES News 24.

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