जिस तरह पीएम मोदी अटल जी के अंतिम यात्रा में 5 किलोमीटर चले काश वैसे ही वह उनके सिद्धांतों पर 2 कदम चल लेते

आज अटल जी हमारे बीच नहीं है फिर भी उनके आदर्श और सिद्धांत जिंदा है । लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है की क्या उनके सिद्धांतों पर उनके पार्टी के नेता चल रहे है। जवाब है नहीं , पीएम मोदी भले ही कितना भी कहे की वह अटल जी के सिद्धांतो को मानते है वह सारा सर गलत है। क्यूंकि गुजरात दंगे के बाद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सोचा था कि मोदी “राजधर्म” (शासक का कर्तव्य) पर एक “कलंक” – एक धब्बा हैं। वाजपेई चाहते थे कि मोदी भाजपा से अपना इस्तीफा दे दें, लेकिन लालकृष्ण आडवाणी मोदी के बचाव में खड़े हो गए। लेकिन आज बात उल्टा आज बीजेपी का मतलब ही सिर्फ नरेंद्र मोदी है । तो चलिए आज यह शो उन लोगों के लिए है जो मोदी की तुलना अटल जी से करते है । आज हम आपको पतायेंगे की कैसे दोनों नेताओं में असमान जमीन का फर्क है ।

नरेंद्र मोदी को लड़कर चुनाव जीतने वाला नेता बताया जाता है तो वहीं देश के पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी को भारत के अलग-अलग समुदायों का दिल जीतने वाला नेता बताया जाता है।

तो चलिए आपको बताते है विपक्ष को लेकर क्या राय रखते है

दोनों नेताओं में सबसे बड़ा अंतर है विपक्ष को लेकर अपनी राय लेकर। अटल बिहारी वाजपेयी वाजपेयी जहां मानते थे की लोकतंत्र तब तक मजबूत नहीं हो सकता जब तक विपक्ष मजबूत न हो वही  वाजपेयी सरकार में बीजेपी अल्पमत में थी। सत्तारूढ़ एनडीए में 13 दल शामिल थे लेकिन उसके बावजूद उसे संसद में विपक्ष का ऐसा विरोध नहीं सहना पड़ा जैसे पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार को झेलना पड़ रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच संबंध वाजपेयी सरकार के बीच उतने कटु नहीं थे जितने कि मोदी सरकार में हैं। नरेंद्र मोदी का मानना है की विपक्ष को इतना कमजोर कर दीया जाए की कोई सवाल नहीं उठा सके । जहां वाजपेयी अक्सर कहा करते थे कि राजनीति में मतभेद होने चाहिए लेकिन मनभेद नहीं लेकिन मोदी सरकार के दौर में जिस तरह गांधी परिवार पर शिकंजा कसा और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हुई उसने सरकार और विपक्ष के बीच खाई चौड़ी की है।

पत्रकारों को लेकर लेकर दोनों नेताओं में अंतर

अगर हम लोकतंत्र की बात करे तो इसमें चौथा स्तंभ पत्रकारों को कहा जाता है। क्यूंकि पत्रकारों का ही काम है की वह सत्ता में बैठे नेताओं से सवाल किये जाए और उनकी गलत नीतियों की आलोचना भि । यह बात अटल बिहारी वाजपेयी अच्छे से समझते थे। तभी तो राष्ट्रपति भवन में एक क्रायक्रम के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी पत्रकार करण थापर को बुलाते है और कहते है करण मैंने तुम्हारी वो हिन्दुस्तान टाइम्स वाली आर्टिकल पढ़ा है । आपको बता दे उस आर्टिकल में करण थापर ने अटल बिहारी वाजपेयी की तीखी आलोचना की थी । लेकिन इससे किसी तरह की आपत्ति अटल बिहारी वाजपेयी को नहीं हुई वही दूसरी तरफ पीएम मोदी को अपनी आलोचना बिलकुल पसंद नहीं है इसका एक उदहारण 2007 में करण थापर द्वारा लिया गया 2007 का वह इंटरव्यू जिसमे गुजरात दंगों को लेकर पूछे गए सवाल पर इंटरव्यू छोड़ दिया और यहाँ तक कहा कि दोस्ती बनी रहे । यह तो हो गयी पुरानी बात आज जिस तरह से पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है खास कर के उनकों जो पीएम मोदी की आलोचना करते है । इसका ताजा उदहारण है पुण्य प्रसून वाजपेयी जिन्होंने यह बताया की कैसे उनके चैनल के मालिक उन्हें नरेंद्र मोदी की आलोचना करने से रोकते है और कैसे उन पत्रकारों को मॉनिटर किया जाता है।

 

 

Deepak Prakash

Deepak Prakash is an Indian Journalist. He is an alumni of ISOMES News 24. with more than one year of experience in digital media. he had worked For many media Houses including Broadcast channels and has been always associated to News 24 . currently he heads the Sports and international desk for Khabarinfo .

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