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जानिए पुरी के जगन्नाथ मंदिर में गांधी परिवार की एंट्री पर लगी रोक की कहानी

भारत के चारों धामों में एक है ओडिशा के पुरी का जगन्नाथ मंदिर। हर हिंदू अपनी जिन्दगी में एक बार इस बार मन्दिर में प्रवेश ज़रूर करना चाहता है। ये मन्दिर समुद्र के तट पर मौजूद है और ऐसा कहा जाता है कि इस मन्दिर के भीतर लहरों की आवाज़ परेशान नहीं करती। इस मन्दिर के दर्शन के लिए लोग दुनियाभर से आते है।

मन्दिर के सेवायत और इतिहासकारों का मानना है कि यहां केवल सनातनी हिन्दू ही प्रवेश कर सकते है, गैर हिन्दूओं के लिए यहां प्रवेश निषेध है। इतिहासकार पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने कहा कि इंदिरा गांधी को 1984 में जगन्नाथ मंदिर में दर्शन इसलिए नहीं करने दिया गया था क्योंकि इंदिरा ने फ़िरोज़ जहांगीर गांधी से शादी की थी, जो कि एक पारसी थे। रथशर्मा ने बताया कि शादी के बाद लड़की का गोत्र पति के गोत्र में बदल जाता है। पारसी लोगों का कोई गोत्र नहीं होता है। इसलिए इंदिरा गांधी हिंदू नहीं रहीं थी। यही नहीं पंडित सूर्यनारायण ने यह भी बताया कि हज़ारों वर्ष पहले जगन्नाथ मंदिर पर कई बार आक्रामण हुआ।

जगन्नाथ मंदिर के गेट पर ही एक शिलापट्ट में 5 भाषाओं में लिखा हुआ है कि यहां सिर्फ हिंदुओं को ही प्रवेश की इजाज़त है। मंदिर के सेवायतों ने बताया कि जगन्नाथ मंदिर को 20 बार विदेशी हमलावरों के द्वारा लूटा गया। खास तौर पर मुस्लिम सुल्तानों और बादशाहों ने जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियों को नष्ट करने के लिए ओडिशा पर हमला किया. लेकिन ये हमलावर जगन्नाथ मंदिर की तीन प्रमुख मूर्तियों, भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की मूर्तियों को नष्ट नहीं कर सके, क्योंकि मंदिर के पुजारियों ने बार-बार मूर्तियों को छुपा दिया। एक बार मूर्तियों को गुप्त रूप से ओडिशा राज्य के बाहर हैदराबाद में भी छुपाया गया था।

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