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जानिए वाघा बॉर्डर पर कब शुरू हुआ बीटिंग रिट्रीट समारोह, क्या है इसकी खासियत

आज के दिन पाकिस्तान से भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन भारत लौट रहे है। बता दे वह अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत आएंगे। उनके स्वागत के लिए वाघा बॉर्डर पर हजारों लोग पहुंचे हैं। और इस वजह से अटारी-वाघा सीमा पर शुक्रवार को होने वाला रिट्रीट समारोह रद्द कर दिया गया है। लेकिन आपको पता है ये बीटिंग रिट्रीट समारोह क्यों होती है।

वाघा बॉर्डर पर बीटिंग रिट्रीट समारोह हर शाम भारत और पाकिस्तान के जवान करते है। इस दौरन दोनों देश के जवान एक दूसरे के साथ गुस्से में हाथ मिलाते हैं। दोनों ओर से सैनिक अपने पैरों को पटकते हुए हवा में काफी ऊपर उठाकर गुस्से का इजहार करते हैं। और इसके बाद सूर्यास्त के समय राष्ट्रीय झंडे उतारे जाते हैं। इस मौके पर भारत की ओर से बीएसएफ के जवान खाकी रंग की ड्रेस में रहते हैं, जबकि पाकिस्तानी रेंजर काले रंग की ड्रेस में रहते हैं।

वाघा बॉर्डर पर कब से शुरू हुआ बीटिंग रिट्रीट समारोह

वाघा बॉर्डर भारत और पाकिस्तान के बीच एक अहम स्थान है। वाघा भारत और पाकिस्तान की सीमा पर स्थित एक गांव है। यह अमृतसर (भारत) और लाहौर (पाकिस्तान) के बीच गैंड ट्रंक रोड पर है। वाघा बॉर्डर लाहौर से 29 किलोमीटर और अमृतसर से 27 किलोमीटर की दूरी पर है। बाघा बार्डर को नियमित रूप से पर्यटकों के लिए खोला जाता है। वही वाघा बॉर्डर के समारोह की शुरुआत 1959 में हुई थी। वाघा बॉर्डर समारोह का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग और सौहार्द का माहौल बनाना है। यह बीटिंग रिट्रीट समारोह के नाम से मशहूर है। इस समारोह के दौरान औपचारिक रूप से सीमा को बंद किया जाता है और दोनों देश के झंडे को उतार दिया जाता है। यह समारोह हर रोज शाम में सूर्यास्त से पहले आयोजित होता है।

बीटिंग रिट्रीट समारोह में क्या है खास

इस बीटिंग रिट्रीट समारोह को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। इस दौरन बोर्डर पर सैनिक परेड निकालते हैं। परेड पूरे धूमधाम से निकाली जाती है। देशभक्ति वाले गीत बजाए जाते हैं, माहौल में देशभक्ति के नारे गूंजते हैं। बॉलिवुड के गानों पर भी लोग थिरकते हुए नजर आते हैं। इसके अलावा कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता है। दोनों देशों के झंडे को सम्मानपूर्वक तरीके से उतारने के साथ ही समारोह का अंत होता है।

वही इस दौरन एक खास चीज भी होती है। दिन भर भारतीय और पाकिस्तानी सैनिक एक-दूसरे को गुस्से से देखते रहते हैं लेकिन झंडा उतारने के दौरान एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं। वैसे तो नियमित रूप से रोजाना वाघा बॉर्डर समारोह का आयोजन होता है लेकिन युद्ध जैसी स्थिति में इसे रोक दिया जाता है।

इस कार्यक्रम में बीएसएफ के जवानों के साथ ही पाक रेंजर के जवान भाग लेते हैं। इसके बाद अच्छे से सीखे हुए जवान इस मौके पर परफॉर्म करते हैं। उन्हें दाढ़ी और मूंछों को मेन्टेन करने के लिए अलग से भत्ता मिलता है।

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