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5 साल पहले आज ही आई थी मोदी नाम की सुनामी…

2014 का चुनाव कई मायनो में खास था, यूपीए सरकार के खिलाफ लोगों में काफी गुस्सा था। अन्ना आंदोलन और रामदेव बाबा के खिलाफ जिस तरह से कांग्रेस पार्टी ने स्टैंड लिया थे, उससे लोगों में कॉग्रेस के प्रति असंतोष का भाव था। देश में हो रही आतंकवादी घटनाओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों में काफी आक्रोश था। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चुप्पी भी लोगों के मन में काफी सवाल खड़े कर चुकी थी, बीजेपी और अन्य विपक्षी पार्टियां भी कांग्रेस के प्रति कमर कस चुकीं थी। लेकिन सवाल यही था कि विपक्ष का चेहरा कौन होगा एनडीए किसके चेहरे के दम पर कांग्रेस को टक्कर देगी। बीजेपी में भी इस बात को लेकर काफी मतभेद की स्थिति थी। पार्टी के वरिष्ठ नेता और अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी रहे लाल कृष्णआडवाणी का दवा कमजोर हो चूका था उनकी उम्र उनके खिलाफ चली गई थी। पार्टी के दूसरे नेताओं में नितिन गटकरी, राजनाथ सिंह और सुषमा स्वराज भी थी लेकिन इन सब में जो सबसे बड़ा चेहरा सामने निकल कर आया वो था तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का। मोदी को मुख्या प्रचारक नियुक्त करने के बाद ये साफ हो गया था कि अगर बीजेपी की सरकार बनी तो प्रधानमंत्री मोदी ही होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में चुनाव का रुख जिस तरह से बीजेपी के रुख में मोड़ा की सभी दल हाँथ धरे बस देखते ही रह गए।

मोदी की लहर ऐसी चली की पूरा विपक्षी खेमा ही उसमे उड़ गया। दो दसक बाद कोई पूर्ण बहुमत की सरकार केंद्र में बन रही थी। 16 मई को नतीजे भी चौंकाने वाले आए, जब 282 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी। इसी के साथ एनडीए के सीटों का आंकड़ा जहां 336 तक पहुंचा तो कांग्रेस को शर्मनाक हार का सामना करते हुए सिर्फ 44 सीटों से संतोष करना पड़ा। अब पांच साल बाद फिर से चुनाव के नतीजे आने वाले हैं पर सवाल ये है कि क्या मोदी जी इन पांच सालो का हिसाब से जनता को संतुष्ट कर पाये।

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